
New Delhi, 20 जुलाई . अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर दायर चार याचिकाओं पर Supreme Court में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रही है और इसमें किसी भी प्रकार की Political बयानबाजी की आवश्यकता नहीं है.
मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की.
यह याचिकाएं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह, अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अधिवक्ता अजय कुमार राय एवं दिनेश कुमार यादव और हिंदू धर्म परिषद की ओर से दायर की गई हैं.
याचिकाओं में कथित चोरी की स्वतंत्र एजेंसी, विशेष रूप से सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई है. इसके साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) या फोरेंसिक ऑडिट कराने, ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जांच पूरी होने तक ट्रस्ट को बड़े वित्तीय निर्णय लेने से रोकने की भी मांग की गई है.
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने विशेष जांच दल (एसआईटी) के पुनर्गठन का सुझाव देते हुए कहा कि जांच टीम की अगुआई किसी वरिष्ठ और अनुभवी आईपीएस अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए, ताकि जांच निर्णायक स्तर तक पहुंच सके. अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस संबंध में केंद्र Government से निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराएं.
पीठ ने यह भी पूछा कि वर्तमान एसआईटी में कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि एसआईटी में Police अधिकारी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यह कोई अलग जांच एजेंसी नहीं है, बल्कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने के बाद दर्ज First Information Report के आधार पर Police जांच कर रही है.
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि राज्य Government की ओर से एक दिन पहले ही स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है. अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच लगातार जारी है.
उन्होंने यह भी कहा कि जांच से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक रूप से अदालत में साझा नहीं की जा सकतीं, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में माना है कि मामला संज्ञेय अपराध का बनता है.
इस मामले में सुनवाई अब अगले Monday को होगी, जब केंद्र Government की ओर से अदालत के समक्ष आगे की स्थिति स्पष्ट की जाएगी.
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एससीएच/एबीएम
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