दिल्ली बिजली कंपनियों के सीएजी ऑडिट पर Supreme Court की रोक, 15 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

New Delhi, 3 जुलाई . Supreme Court ने Friday को दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के ऑडिट को लेकर चल रहे विवाद में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया. अदालत ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा प्रस्तावित ऑडिट और स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति से संबंधित आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है.

न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने यह अंतरिम आदेश दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई के दौरान दिया. डीईआरसी ने बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) के आदेशों को चुनौती दी है.

मामले में नोटिस जारी करते हुए Supreme Court ने कहा कि यह विवाद एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न से जुड़ा है, जिस पर विचार किया जाना आवश्यक है. अदालत ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया.

Supreme Court ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय करते हुए एपीटीईएल के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें डीईआरसी को ऑडिट के लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था.

अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल सीएजी भी इस ऑडिट की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाएगा.

यह विवाद Supreme Court के एक पुराने फैसले से जुड़ा है, जिसमें 2011 से 2014 के बीच डीईआरसी द्वारा जारी टैरिफ आदेशों से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई थी. अगस्त 2025 में दिए गए अपने फैसले में Supreme Court ने बिजली वितरण कंपनियों द्वारा जमा किए गए नियामकीय परिसंपत्तियों (रेगुलेटरी एसेट्स) पर चिंता जताई थी और बिजली नियामक आयोगों को यह जांच करने का निर्देश दिया था कि ये परिसंपत्तियां किन परिस्थितियों में जमा हुईं.

हालांकि, उस फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि यह ऑडिट कौन करेगा.

इसके बाद मार्च 2026 में दिल्ली के उपGovernor ने सीएजी से ऑडिट कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. इस फैसले को एपीटीईएल में चुनौती दी गई, जहां न्यायाधिकरण ने कहा कि कानून के तहत डीईआरसी सीएजी को ऑडिट का काम नहीं सौंप सकता. इसके बजाय उसने डीईआरसी को एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया.

डीईआरसी की पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं, जिसके बाद आयोग ने Supreme Court का रुख किया.

सुनवाई के दौरान डीईआरसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि Supreme Court के अगस्त 2025 के फैसले में जिस ऑडिट की बात कही गई थी, वह नियामकीय परिसंपत्तियों से जुड़े मुद्दे के समाधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार की वसूली से पहले इसे पूरा किया जाना जरूरी है.

वहीं बिजली कंपनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि वर्तमान विवाद केवल इस बात तक सीमित है कि ऑडिट कौन करेगा. उन्होंने कहा कि ऑडिट और नियामकीय परिसंपत्तियों की वसूली दो अलग-अलग मुद्दे हैं.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद Supreme Court ने कहा कि इस मामले में उसके अगस्त 2025 के फैसले की व्याख्या करना आवश्यक है. इसके चलते अदालत ने मामले को India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के समक्ष भेजने का निर्देश दिया, ताकि इसे सुनवाई के लिए उचित पीठ को सौंपा जा सके.

एएमटी/