Supreme Court ने भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय के खिलाफ सोमनाथ भारती की याचिका पर सुनवाई को जताई सहमति

New Delhi, 17 जुलाई . 2025 विधानसभा चुनाव में मालवीय नगर से भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर Supreme Court ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है.

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने भारती की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सतीश उपाध्याय की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह की संक्षिप्त सुनवाई के बाद अपील करने की अनुमति दी. आप नेता सोमनाथ भारती ने Supreme Court में याचिका दायर की है.

सोमनाथ भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट के 17 जनवरी के फैसले को Supreme Court में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने उनकी चुनाव याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट ने कहा था, भारती अपनी याचिका में उस जरूरी पार्टी को शामिल करने में विफल रहे, जिसके खिलाफ उन्होंने भ्रष्ट आचरण के आरोप लगाए थे. यह एक ऐसी चूक है जिसके कारण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत याचिका को अनिवार्य रूप से खारिज किया जाना चाहिए.

सतीश उपाध्याय ने 2025 के विधानसभा चुनाव में तीन बार के विधायक रहे सोमनाथ भारती को करीब 2,100 वोटों से हराया था. सोमनाथ भारती का आरोप है कि सतीश उपाध्याय ने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक शिकायत और First Information Report की जानकारी नामांकन में नहीं दी. उन्होंने मतदाताओं को मतदान केंद्र तक ले जाने के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल किया. उन्होंने याचिका में दावा किया कि उपाध्याय ने कांग्रेस उम्मीदवार जितेंद्र कुमार कोचर के साथ मिलकर उनको निशाना बनाकर एक विशेष अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य वोटों को बांटना और अनुचित लाभ प्राप्त करना था.

सोमनाथ भारती ने आरोप लगाया था कि भाजपा के विधायक सतीश उपाध्याय ने जनता के सामने झूठ का पुलिंदा पेश किया. उन्होंने कहा कि 27 सितंबर 2008 को जब भाजपा के नेतृत्व में एमसीडी के पार्क में भगत सिंह की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ की गई थी, तो भाजपा ने उस पर ध्यान नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि कई सालों तक जब आम आदमी पार्टी दिल्ली Government में थी, तो एमसीडी में भाजपा Government थी. एमसीडी के अंतर्गत यह पार्क आता है जिसमें भगत सिंह की प्रतिमा खंडित हो चुकी थी. उनसे बार-बार कहा गया कि कृपया इसे ठीक करवा दें, लेकिन नहीं ठीक करवाया गया. जिसके बाद जब आम आदमी पार्टी एमसीडी में सत्ता में आई, तो 23 मार्च 2024 को अपने व्यक्तिगत फंड से आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए और क्षेत्रवासियों के सहयोग से मूर्ति की पुनः स्थापना की गई. जबकि अब सतीश उपाध्याय इस मूर्ति के नीचे खड़े होकर कहते हैं कि 3 साल पहले से यह मूर्ति खंडित पड़ी हुई है, यह बात पूरी तरीके से झूठ है.

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