
New Delhi, 26 अक्टूबर . India निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने Supreme Court में हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने हलफनामे में कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों एसआईआर आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे. ईसीआई ने माना कि ऑनलाइन फॉर्म को देखकर ऐसा लग सकता था कि उसमें संशोधन किया गया है. 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म 6 और घोषणा-पत्र अलग-अलग दिखाए जाएंगे, जैसा कि भौतिक फॉर्म में है.
ईसीआई ने कहा है कि मैपिंग नहीं होने वाले मतदाताओं को सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना जरूरी नहीं होगा. बीएलओ उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे. सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन कराई जाएगी.
ईसीआईनेट पर चुनाव आयोग ने बताया है कि ईआरओ के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ा या हटाया नहीं जाता. नियमों के अनुपालन की जांच के लिए आईआईटी और आईआईएससी के विशेषज्ञों वाली समिति गठित की गई है.
गोवा के 97 मतदाताओं के मामले पर आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि छूट गए 97 मतदाताओं में से 88 पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे.
पश्चिम बंगाल की अपीलों पर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ अपीलें सीईओ, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने Supreme Court के निर्देशों के तहत दायर की थीं. ईसीआई ने कहा कि ये मामले आयोग के समक्ष नहीं रखे गए थे.
चुनाव आयोग ने याचिका की सुनवाई-योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीईसी को पद से हटाने की प्रक्रिया Supreme Court के न्यायाधीश को हटाने जैसी है. आयोग ने मीडिया में आंतरिक दस्तावेज जारी करने से इनकार किया. ईसीआई ने कहा कि उसने किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही उसे जारी करने की अनुमति दी.
आयोग ने ईवीएम से जुड़ी याचिकाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईवीएम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को Supreme Court पहले ही कई बार खारिज कर चुका है. आयोग ने विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी और कहा कि दशहरा अवकाश के कारण आयोग ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और Supreme Court से विस्तृत, बिंदुवार जवाब देने की अनुमति मांगी है.
यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया था. निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसके समक्ष दाखिल किए गए प्रति-हलफनामे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी. चुनाव आयोग के कामकाज और विभिन्न राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दायर Lok Sabha में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक साथ हलफनामा Supreme Court में दाखिल किया है.
ईसीआई ने Supreme Court में दाखिल हलफनामे में सीईसी पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि याचिका सिर्फ एक खबर पर आधारित है. सीईसी ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले लेने की खबर को गलत बताया गया है.
हलफनामे में कहा गया है कि एसआईआर के तीनों आदेश (जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026) आयोग के सर्वसम्मत फैसले हैं. हलफनामे में कहा गया है कि फाइल सिस्टम के मुताबिक फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है. नोट या सवाल फैसले नहीं होते हैं.
हलफनामे के मुताबिक, 28 जुलाई का ऑर्डर एडिशनल सेक्रेटरी ने जारी किया था. दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को लिखा. 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ. हलफनामे में बताया गया है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसे सिर्फ Government बदल सकती है. एसआईआर डिक्लेरेशन अलग है. 21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म भी दो हिस्सों फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन में बंटेगा.
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एमएस/
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