
New Delhi, 29 अक्टूबर . Supreme Court ने Thursday को छत्तीसगढ़ Government की उन याचिकाओं का निपटारा कर दिया, जिनमें कथित शराब घोटाले और कस्टम राइस मिलिंग घोटाले के मामलों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को मिली जमानत को चुनौती दी गई थी.
साथ ही, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगर अनिल टुटेजा अपनी जमानत का दुरुपयोग करते पाए जाते हैं, तो राज्य Government उनकी जमानत रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है.
India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने कहा कि यदि जमानत की सुविधा का कोई दुरुपयोग होता है, तो इस बात को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जा सकता है ताकि उचित कार्रवाई की जा सके.
सुनवाई के दौरान, सीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की, “यदि जमानत की सुविधा का कोई दुरुपयोग होता है, तो आप जमानत को तुरंत रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं.”
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि टुटेजा को जमानत देते समय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियां केवल उनकी जमानत याचिकाओं पर विचार करने तक ही सीमित थीं. इन टिप्पणियों का ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) द्वारा मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाए जाने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
Supreme Court ने कहा, “उच्च न्यायालय के निष्कर्ष केवल जमानत देने के सीमित उद्देश्य के लिए हैं. ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होगा.”
अदालत ने आगे कहा कि यदि जमानत के दुरुपयोग का कोई मामला सामने आता है, तो राज्य Government कानून के अनुसार उच्च न्यायालय में जाकर इस राहत (जमानत) को रद्द कराने की मांग कर सकती है.
छत्तीसगढ़ Government ने दो मामलों में टुटेजा को नियमित जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेशों को चुनौती दी थी. Supreme Court ने इन विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही राज्य Government को यह अधिकार सुरक्षित रखा कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है या सुविधा का दुरुपयोग किया जाता है, तो वह जमानत रद्द कराने की मांग कर सकती है.
‘कस्टम राइस मिलिंग’ घोटाले के कथित मामले में, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 13 जनवरी 2026 को टुटेजा को नियमित जमानत दी थी. यह मामला इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू)/एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था.
यह मामला छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों से ‘कस्टम मिलिंग’ के लिए प्रोत्साहन के नाम पर अवैध वसूली करने के आरोपों से जुड़ा है. अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह वसूली एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसमें सरकारी अधिकारी और निजी व्यक्ति शामिल थे, जबकि टुटेजा ने इन आरोपों से इनकार किया है.
जमानत देते समय, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने टुटेजा द्वारा जेल में बिताई गई अवधि, जांच के चरण, सबूतों की प्रकृति और मुकदमे के लंबा खिंचने की संभावना को ध्यान में रखा था. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि अभियोजन पक्ष ने टुटेजा पर मुकदमा चलाने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं ली थी, जिस वजह से ट्रायल कोर्ट उनके खिलाफ लगे आरोपों पर संज्ञान नहीं ले सका.
कोर्ट ने कहा कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब ट्रायल के उचित समय के भीतर पूरा होने की संभावना न हो.
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एससीएच/एबीएम
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