Supreme Court ने नीट-यूजी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर रद्द की, भाजपा शासित राज्यों में भी मामले वापस होंगे: नड्डा

New Delhi, 1 सितंबर . नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में Supreme Court ने Tuesday को बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली समेत पांच राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज First Information Report रद्द करने का आदेश दिया. अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली, असम, Maharashtra, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज मामलों को निरस्त किया.

Supreme Court के फैसले के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि केंद्र Government छात्रों से किया गया अपना वादा पूरा कर रही है और भाजपा शासित राज्यों में भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे.

नड्डा ने कहा, “25 जुलाई 2026 को Union Minister डॉ. जितेंद्र सिंह और मैंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की थी. छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए India Government की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी. इसी क्रम में भाजपा शासित राज्यों की Governmentों से भी बातचीत की गई और अब हम उस आश्वासन को पूरा कर रहे हैं.”

उन्होंने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि युवाओं की प्रगति और विकास Government की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

Supreme Court ने अपने आदेश में दिल्ली Police को फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के जरिए चिन्हित 2,873 आपराधिक इतिहास वाले लोगों के खिलाफ अलग से नई First Information Report दर्ज करने की अनुमति भी दी है.

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि Government और अदालत के आदेश को देखते हुए पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है.

सौरव दास ने कहा कि दिल्ली Police ने फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के आधार पर दावा किया था कि प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि यदि ऐसे लोग वास्तव में वहां मौजूद थे, तो उनके खिलाफ अलग से जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, न कि प्रदर्शनकारी छात्रों को निशाना बनाया जाना चाहिए.

उन्होंने बताया कि Supreme Court ने ऐसे लोगों की जांच के लिए अलग First Information Report दर्ज करने का निर्देश दिया है. साथ ही, अदालत ने प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने के Government के आश्वासन को भी अपने आदेश का हिस्सा बनाया है. Government ने अदालत को भरोसा दिया कि मुआवजे की राशि 90 दिनों के भीतर सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी.

सीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि Government के सकारात्मक आश्वासन और Supreme Court के आदेश का सम्मान करते हुए पार्टी 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस ले रही है. सौरव दास ने इस फैसले के लिए अदालत, दोनों पक्षों के वकीलों और सॉलिसिटर जनरल का आभार भी जताया. Supreme Court ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया.

डीएससी