पंजाब के राज्यपाल से मिले सुखविंदर सिंह सुक्खू, चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सेदारी पर फिर जताया हिमाचल का दावा

चंडीगढ़, 26 जून . Himachal Pradesh के Chief Minister सुखविंदर सिंह सुक्खू ने Friday को पंजाब के Governor गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और राज्य के लिए बेहद अहम और काफी समय से लंबित कई मुद्दों पर चर्चा की.

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के अधिकारों और हितों से जुड़े मामलों के जल्द समाधान के लिए पंजाब के गवर्नर का समर्थन मांगा.

Himachal Pradesh के Chief Minister ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में राज्य के जायज 7.19 प्रतिशत हिस्से पर दावा दोहराया. पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि Himachal Pradesh पुराने पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य है और राज्य को सौंपे गए क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर उसे अपना उचित हिस्सा पाने का अधिकार है.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चंडीगढ़ का विकास अविभाजित पंजाब के संयुक्त संसाधनों से हुआ था और जहां पंजाब और Haryana को पांच दशकों से अधिक समय से शहर की जमीन, संपत्ति और प्रशासनिक ढांचे से फ़ायदा मिला है, वहीं Himachal Pradesh को अभी तक अपना उचित हिस्सा नहीं मिला है.

उन्होंने आग्रह किया कि राज्य को चंडीगढ़ में उसका उचित 7.19 प्रतिशत हिस्सा दिया जाए.

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शहर में आने वाले राज्य के लोगों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए चंडीगढ़ में एक अतिरिक्त ‘हिमाचल सदन’ की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि दशकों पहले बना मौजूदा ‘हिमाचल भवन’, Himachal Pradesh से आने वाले छात्रों, मरीजों और अन्य आगंतुकों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने के लिए अब पर्याप्त नहीं है.

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ राज्य के लिए उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और प्रशासनिक सेवाओं के एक प्रमुख केंद्र के रूप में काम करता है, जहां हर महीने हजारों निवासी आते हैं, जिनमें पीजीआई में इलाज कराने वाले बड़ी संख्या में मरीज भी शामिल हैं.

Himachal Pradesh के Chief Minister ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन के साथ बातचीत के बाद प्रस्तावित हिमाचल सदन के लिए सेक्टर 52 में 4.736 एकड़ की उपयुक्त जगह की पहचान की गई है.

उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से संबंधित लंबे समय से लंबित बकाया राशि के निपटारे के लिए भी हस्तक्षेप की मांग की. Chief Minister ने कहा कि Supreme Court ने बीबीएमबी परियोजनाओं और उससे जुड़े लाभों में Himachal Pradesh के 7.19 प्रतिशत हिस्से के अधिकार को मान्यता दी है.

उन्होंने कहा कि राज्य एक दशक से अधिक समय से 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़ी वित्तीय बकाया राशि के अपने अधिकार के मिलने का इंतजार कर रहा है. Chief Minister सुक्खू ने Himachal Pradesh में स्थित ऐतिहासिक शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी उठाया.

उन्होंने कहा कि पुराना मंडी राज्य कभी भी संयुक्त पंजाब राज्य का हिस्सा नहीं था. इसके बजाय, 1948 में यह India संघ में शामिल हो गया. इसके बाद, 1951 में Himachal Pradesh को ‘भाग सी’ राज्य बनाया गया और बाद में 1 नवंबर, 1956 से इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया.

Chief Minister ने कहा कि शानन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट Himachal Pradesh के मंडी जिले में स्थित है. यह इलाका पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 2(एन) के तहत परिभाषित “ट्रांसफर्ड टेरिटरीज” (हस्तांतरित क्षेत्रों) में कभी शामिल नहीं था. इसलिए, जिस इलाके में यह प्रोजेक्ट स्थित है. वहां इस अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होते और न ही इसके तहत प्रोजेक्ट पर कोई अधिकार हासिल किया जा सकता है.

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि शानन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए 99 साल की लीज 2 मार्च 2024 को खत्म हो गई. उन्होंने कहा कि लीज खत्म होने के साथ ही उससे जुड़े सभी अधिकार भी खत्म हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि खत्म हो चुकी लीज के आधार पर प्रोजेक्ट को चलाने, उसका मैनेजमेंट करने या उस पर कब्जा बनाए रखने का कोई भी दावा कानूनी आधार नहीं रखता और कानून की नजर में टिक नहीं सकता.

Chief Minister ने भरोसा जताया कि सभी लंबित मामलों को रचनात्मक बातचीत, आपसी सम्मान और सहकारी संघवाद की भावना से सुलझाया जा सकता है.

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