सुखपाल खैरा ने की पंजाब विधानसभा का सत्र बढ़ाने की मांग, कहा-बिलों पर ठीक से हो बहस और जांच

चंडीगढ़, 9 अगस्त . कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने Sunday को पंजाब Government और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से विधानसभा सत्र को कम से कम कुछ और दिनों तक बढ़ाने का आग्रह किया ताकि आखिरी दिन विचार के लिए प्रस्तावित छह बिलों की ठीक से जांच और उन पर बहस हो सके.

खैरा ने कहा कि आधिकारिक विधायी कामकाज के अनुसार, Monday को सदन में छह बिल पेश किए जाएंगे.

इनमें तीन डिजिटल यूनिवर्सिटी, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST), आउटसोर्स किए गए कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बिल शामिल हैं.

खैरा ने एक बयान में कहा, “पंजाब पर दूरगामी असर डालने वाले छह नए कानूनों की ठीक से जांच, उन पर बहस और उन्हें पास कैसे किया जा सकता है, वो भी विधानसभा सत्र के आखिरी कामकाजी दिन? यह सार्थक संसदीय लोकतंत्र नहीं है. Government को विधायकों को बिलों का अध्ययन करने, स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेने और व्यापक जनहित में संशोधन पेश करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए.”

उन्होंने आखिरी समय में ऐसे महत्वपूर्ण कानून लाने की समझदारी पर सवाल उठाया, जब विधायकों के पास बारीकियों की जांच करने, उनके असर को समझने या संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण मांगने का शायद ही कोई मौका होता है.

खैरा ने कहा, “विधानसभा कैबिनेट के लिए रबर स्टैम्प नहीं है. विधायिका का मकसद कानून की हर धारा की जांच करना, उसके गुण-दोष पर बहस करना और पंजाब के लोगों के हितों की रक्षा करना है. सिर्फ इसलिए कि कल आखिरी कामकाजी दिन है, सदन में छह बिलों को जल्दबाजी में पास करना विधायी प्रक्रिया को महज एक औपचारिकता बना देने जैसा है.”

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) Government को यह याद रखना चाहिए कि कानून कोई अस्थायी Political घोषणाएं नहीं होते हैं.

“एक बार लागू होने के बाद, वे आने वाले वर्षों तक पंजाब के संस्थानों, अर्थव्यवस्था, कर्मचारियों, छात्रों, व्यवसायों और नागरिकों को प्रभावित करते हैं.”

उन्होंने विशेष रूप से विधानसभा सत्र के आखिरी समय में अन्य प्रमुख विधायी प्रस्तावों के साथ तीन अलग-अलग डिजिटल यूनिवर्सिटी बिल पेश करने की जल्दबाजी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य Government को यह बताना चाहिए कि इन मामलों को पहले सदन में क्यों नहीं लाया गया ताकि उन पर पर्याप्त चर्चा हो सके.

खैरा ने कहा, “पंजाब पहले ही खराब तरीके से सोचे-समझे और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के कारण बहुत नुकसान उठा चुका है. पंजाब के भविष्य के लिए कानून जल्दबाजी में नहीं बनाए जा सकते. अगर Government सच में मानती है कि ये बिल पंजाब के हित में हैं, तो उसे सत्र बढ़ाने और पूरी और सार्थक बहस की अनुमति देने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए.”

उन्होंने विधानसभा स्पीकर संधवान से अपील की कि वे विधायिका की गरिमा और सर्वोच्चता बनाए रखें. उन्होंने कहा कि Government के विधायी एजेंडे को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण बिलों को जल्दबाजी में पास करने के बजाय चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए.

एससीएच/पीएम