जेल से भीड़ कम करने के लिए रिहा किए जाएंगे ऐसे कैदी

नई दिल्ली (New Delhi) . अपीलों के लंबन और देरी के कारण जेल में कैदियों की भीड़ को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने निर्देश दिए हैं कि तय सजा (तीन, पांच, सात 10 और 20 साल आदि) पाए ऐसे कैदी जो सजा की आधी से ज्यादा अवधि जेल में गुजार चुके है, उन्हें रिहा करने पर विचार किया जाए. शीर्ष कोर्ट ने आदेश में कहा कि ऐसे कैदी यदि लिख कर देते हैं कि उन्होंने जो अपराध किया है उस कृत्य के लिए उन्हें पछतावा है और उन्हें जो जेल की सजा मिली है वह सही है तो सरकार ऐसे कैदियों की शेष सजा माफ करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है और उन्हें जेल से रिहा कर सकती है. कोर्ट ने इसके लिए समय सीमा भी तय की है. शीर्ष कोर्ट ने इस बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और कहा कि हर जिला जेल का अधीक्षक ऐसे कैदियों की पहचान कर उनकी सूचना जिला लीगल सेवा समिति को देंगे जो उनकी अर्जी बनाकर सरकार को भेजेगी. राज्य सरकारें इन अर्जियों पर तय समय के अंदर फैसला लेगी. इस योजना में माफ किए दोषियों को उच्च न्यायालय में दायर अपनी अपीलों को वापस लेना होगा. न्यायमूर्ति एस.के. कौल और एम.एम. सुंदरेश की पीठ ने आदेश में कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) उच्च न्यायालयों में शुरू किया जाए. इसकी रिपोर्ट जनवरी 2022 में कोर्ट में रखी जाएगी. कोर्ट ने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य यह नहीं है कि दोषियों से जबरन कबूलनामा लिखवाया जाए और उनके सजा के खिलाफ अपील करने के अधिकार को समाप्त कर दिया जाए. यह पूर्णतया स्वैच्छिक होगा. इसके अलावा उम्रकैद की सजा वाले मामलों में जहां दोषी आठ साल की सजा जेल में काट चुके हैं उनकी जमानत याचिकाएं लीगल सेवा समित उच्च न्यायालय में दायर करेगी. वहीं जिन उम्र कैदियों ने 16 साल की कैद काट ली है उन्हें रिहा करने के लिए भी लीगल सेवा समिति अर्जी दायर करेगी और सरकार इन अर्जियों पर तय सीमा के अंदर फैसला लेगी.

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