
New Delhi, 5 अगस्त . Prime Minister Narendra Modi ने Wednesday को social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सुभाषित शेयर किया है.
Prime Minister ने एक्स पर लिखा, “आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है. इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है.”
इसके साथ ही श्लोक भी लिखा है, “आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती. तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते.” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “स्वयं का उत्था करना और निरंतर आगे बढ़ना ही जीवन की सच्ची नीति है. इसी ध्येय को आधार बानकर गुणी और विद्वान लोग अपने ज्ञान, कौशल और प्रभाव का विस्तार करते हैं, ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें.”
इसके पहले Tuesday को Prime Minister की ओर से एक्स पर लिखा गया था, “निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है. आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं.” इसके साथ ही उन्होंने एक संस्कृत श्लोक, “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते. तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति॥” साझा किया था.
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है. कर्मयोग या साधना के द्वारा जिसका अंतःकरण भली-भांति शुद्ध हो गया है, वह साधक समय आने पर उस परम ज्ञान को अपने आप ही अपने भीतर आत्मा में अनुभव कर लेता है.”
बीते दिन Monday को पीएम मोदी ने श्लोक शेयर करते हुए लिखा था, “त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः. याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव.”
जिसका हिंदी अर्थ है कि भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि धैर्य के कारण वह कभी भी अपनी खोई हुई अनुकूल स्थिति को पुनः प्राप्त कर सकता है. जिस प्रकार समुद्र के बीच में जहाज टूट जाने पर भी एक कुशल नाविक केवल अपने कर्म, अर्थात जीवित रहने और तैरने के प्रयास की ही इच्छा करता है और हिम्मत नहीं हारता.
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ओपी/पीएम
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