
New Delhi, 29 जुलाई . Samajwadi Party के सांसद अवधेश प्रसाद ने Wednesday को नीट पेपर लीक मामले में कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि Government जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है.
अवधेश प्रसाद ने नीट पेपर लीक मामले में चार्जशीट दाखिल होने पर समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “जिम्मेदार लोग जो हैं, उनको तो छोड़ दिया गया है. काफी लोग हैं, Government उनको बचाने का काम कर रही है. उन तक अभी नहीं पहुंचे हैं. Government तमाम लोगों को बचा रही है.”
इसी बीच, एंटी पेपर लीक विधेयक पर अवधेश प्रसाद ने कहा, “ये (Government) बिल नया ला रहे हैं. बिल कितना कारगर और प्रभावी होगा, ये सब कुछ निर्भर करता है कि इस बिल को पालन कराने वाले कौन लोग हैं? किसके हाथ में सत्ता है? यह नीयत पर अधिक निर्भर है, क्योंकि तमाम ऐसे कानून बने हुए हैं, जो असरदार नहीं हैं.”
सपा सांसद ने कहा कि पेपर लीक के मामले में जिस तरह से देश के युवाओं ने अपनी ताकत और एकजुटता दिखाई, जिसको लेकर Government को झुकना पड़ा. जबकि Government को इस बात का अभिमान था कि हमें कोई झुका नहीं पाएगा. अब ये बात साबित हो गई कि झुकाने वाला अगर है, तो Government झुकती भी है, झुकेगी.”
वहीं, सांसद ने ‘वंदे मातरम बिल’ पर कहा, “वंदे मातरम का तो स्वागत है. समूचे देश में स्वागत है. कोई नया नहीं है, बहुत पहले से है. अब ये होना चाहिए कि वंदे मातरम की जो प्रेरणा थी, जो मंशा थी, वह पूरी होनी चाहिए. आज जरूरत है कि संकल्प लिया जाए कि हम ‘वंदे मातरम’ की स्पिरिट और सपने को साकार करें.”
उन्होंने उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती को लेकर योगी Government की ओर से दायर हलफनामे पर भी प्रतिक्रिया दी. सपा सांसद ने कहा, “ये 69,000 शिक्षकों की नौकरी को लेकर Samajwadi Party लगातार उठाने का काम करती रही. हमें भी विधानसभा में बैठने का मौका मिला. इस बात को बड़ी मजबूती के साथ Samajwadi Party ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में उठाया था. Government की तरफ से गोलमोल जवाब आया और ये कहते रहे कि न्यायालय में मामला विचाराधीन है. आज भी ये मामला लटका हुआ है. जबकि इनके पास न तो कोई तर्क है, न कोई ठोस साक्ष्य है.”
उधर, नीट पेपर लीक मामले पर Samajwadi Party के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, “जनता के भारी दबाव के बाद भाजपा Government ने आखिरकार नीट पेपर लीक मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है. अगर यह कार्रवाई पहले की गई होती और धर्मेंद्र प्रधान को पहले ही हटा दिया गया होता, तो युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता.”
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डीसीएच/
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