
New Delhi, 21 जुलाई . कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा Tuesday को जारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा खरीफ सीजन में 17 जुलाई तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई का रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 700.47 लाख हेक्टेयर था.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक धान की बुवाई 166.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 167.83 लाख हेक्टेयर थी. बुवाई क्षेत्र में आई इस कमी का मुख्य कारण इस वर्ष एल नीनो मौसमीय प्रभाव के कारण कमजोर मानसून को माना गया है.
इसी तरह, उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों का बुवाई क्षेत्र भी घटकर 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 81.52 लाख हेक्टेयर था.
ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज (श्री अन्न/मिलेट्स) का बुवाई क्षेत्र भी मौजूदा सीजन में अब तक 98.69 लाख हेक्टेयर आंका गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 127.30 लाख हेक्टेयर से कम है.
पहले बोई जाने वाली वार्षिक फसल गन्ने का रकबा इस वर्ष अब तक 119.03 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 134.09 लाख हेक्टेयर था.
इस बीच, Prime Minister Narendra Modi की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके.
खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित करने की बात कही गई थी.
उत्पादन लागत की तुलना में किसानों को सबसे अधिक अनुमानित लाभांश मूंग पर 61 प्रतिशत मिलेगा. इसके बाद बाजरा और मक्का पर 56-56 प्रतिशत तथा तूर/अरहर पर 54 प्रतिशत का लाभांश मिलने का अनुमान है.
अन्य खरीफ फसलों के लिए किसानों को उत्पादन लागत पर लगभग 50 प्रतिशत का लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है.
Government ने हाल के वर्षों में दलहन, तिलहन और पोषक अनाज जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए इन फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी प्रदान करने की नीति अपनाई है.
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एबीएस
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