
New Delhi, 25 जुलाई . सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने Saturday को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत बताया.
सोनम वांगचुक ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह लोकतंत्र की जीत है. यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. बधाई हो सीजेपी, देश की जेन जी और सभी नागरिकों का धन्यवाद कि उन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज उठाई.
उन्होंने आगे कहा, “जवाबदेही से अब सुधार की ओर.”
वांगचुक 26 दिनों से भूख हड़ताल पर थे. वे बार-बार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.
23 जुलाई को एनडीए Government से लिखित आश्वासन मिलने के बाद एक्टिविस्ट ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में Union Minister जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपनी हड़ताल खत्म की थी.
इस बीच Saturday को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा की. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से उन्हें गहरा दुख हुआ है और वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर हुए विवाद से पैदा हुई स्थिति का देश-विरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें.
इस्तीफा सौंपते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं और शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और समर्थन के लिए Prime Minister Narendra Modi का धन्यवाद किया. उन्होंने इसे परीक्षा की शुचिता और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया.
सीजेपी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि लोकतंत्र की जीत. इसके साथ एक वीडियो भी था जिसमें प्रदर्शनकारी प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाते हुए दिख रहे थे.
प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि हमने कर दिखाया. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. वे क्या कहते थे कि इस Government में इस्तीफे नहीं होते. हम कहते हैं कि दुनिया झुकती है, बस सही लोगों की जरूरत होती है.
उन्होंने कहा कि यह उनके लिए है, उन सभी छात्रों के लिए जिन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के कारण अपनी जान गंवाई. उन्होंने कहा कि प्रधान का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर आप लोग डरते नहीं हैं, अगर आप लोग इस Government के सामने झुकते नहीं हैं तो हम किसी का भी इस्तीफा ले सकते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है. यह लोकतंत्र है और उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए हमें अपनी आवाज उठानी होगी. वे हमारी वजह से ही सत्ता में हैं.
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डीकेएम/
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