
Mumbai , 15 अगस्त . शिवसेना (यूबीटी) ने Saturday को कहा कि India का स्वतंत्रता दिवस हमेशा की तरह मनाया गया, लेकिन पिछले एक दशक में देश के इस राष्ट्रीय पर्व ने तेजी से Political और उत्सव जैसा रूप ले लिया है, मानो यह सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी या संघ परिवार का कोई कार्यक्रम हो.
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट ने कहा कि जब Prime Minister Narendra Modi लाल किले पर मंच संभालते हैं तो उनकी पारंपरिक पगड़ी और पहनावे का चुनाव आने वाले राज्य चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया लगता है.
स्वतंत्रता दिवस पर भी Government के कामों में Political फायदे-नुकसान की सोच दिखती है और इस मौके पर भाजपा प्रायोजित कार्यक्रम किए जाते हैं.
संपादकीय में कहा गया, “जश्न से पहले पार्टी ने बड़े पैमाने पर प्रचार के साथ ‘तिरंगा यात्रा’ अभियान चलाया. भव्य रैलियों का मकसद सत्ताधारी पार्टी को भारतीय तिरंगे का मुख्य निर्माता और रक्षक दिखाना था और ऐसा माहौल बनाया गया जैसे India में राष्ट्रीय ध्वज पहली बार फहराया जा रहा हो.”
‘सामना’ ने मौजूदा Political अभियानों और ऐतिहासिक सच्चाइयों के बीच बड़ा अंतर बताया.
1947 से पहले हुई सुबह की रैलियों और सत्याग्रहों के दौरान भाजपा का मूल संगठन आजादी की लड़ाई से दूर था. जिन संगठनों ने ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज के प्रति बहुत कम लगाव दिखाया, उन्होंने अचानक इसे अपना लिया है.
‘तिरंगा यात्रा’ और ‘हर घर तिरंगा’ जैसे एक साथ चल रहे अभियानों के जरिए सत्ताधारी पार्टी की राष्ट्रवाद की सोच पूरी तरह से सामने आई है.
संपादकीय में कहा गया कि विरोधी तर्क देते हैं कि पार्टी स्वतंत्रता दिवस के भावनात्मक माहौल का इस्तेमाल Political फायदे के लिए और देशभक्ति की छवि बनाने के लिए कर रही है.
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि भाजपा ने स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रीय ध्वज और ‘वंदे मातरम’ को बड़े पैमाने पर जनसंपर्क कार्यक्रमों में बदल दिया है, इसलिए इन अभियानों के समय और तीव्रता पर सवाल उठते हैं.
रैलियों का नेतृत्व करने वाले लोग आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं थे और न ही उन्होंने लाठीचार्ज का सामना किया या इस मकसद के लिए खून बहाया.
संपादकीय में कहा गया कि हजारों स्वतंत्रता सेनानी तिरंगा थामे और ‘वंदे मातरम’ गाते हुए फांसी पर चढ़ गए, जबकि आज के समर्थक चुप रहे. ठाकरे गुट का तर्क है कि राष्ट्रवादी कार्यक्रमों के आयोजन की यह अचानक होड़ ऐसे समय में मची है जब Political दबाव बढ़ रहा है. जंतर-मंतर जैसी जगहों पर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और देशभर में मिल रही Political चुनौतियों ने सत्ताधारी पार्टी को बचाव की मुद्रा में ला दिया है.
इसमें कहा गया है, “2014 में समर्थकों ने Narendra Modi Government के आने को भारतीय स्वतंत्रता का असली सवेरा बताया था. आज जब जनता की सोच बदल रही है, तो जो लोग कभी झंडे को सिर्फ एक सरकारी औपचारिकता मानते थे, वे अब अपनी जन-छवि को मजबूत करने के लिए कट-आउट, रैलियों और देश भर में होने वाले कार्यक्रमों पर भारी रकम खर्च कर रहे हैं.”
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डीकेएम/
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