
Mumbai , 30 जून . शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में Maharashtra में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया है. इसके साथ ही भाजपा के नेतृत्व वाली Government पर निशाना साधते हुए महिलाओं और बच्चियों के प्रति बढ़ रहे अपराध को लेकर सवाल पूछा है.
शिवसेना (यूबीटी) ने सामना में लिखा, Maharashtra के नसरापुर उत्पीड़न और हत्या मामले में विशेष अदालत ने दरिंदे को Monday को मौत की सजा सुनाई है. भोर तालुका के नसरापुर में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुए इस उत्पीड़न और उसके बाद की गई उसकी नृशंस हत्या से पूरा Maharashtra दहल गया था. अब अदालत के इस फैसले से उस अभागिन मासूम और उसके माता-पिता को न्याय तो मिल गया है, लेकिन क्या इसके बाद यह कहा जा सकता है कि Maharashtra की महिलाएं और मासूम बच्चियां सुरक्षित हो गई हैं? अब सत्ताधारी दल इस बात का ढिंढोरा पीटेंगे कि कैसे उन्होंने नसरापुर मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया, महज 58 दिनों के भीतर इसका निपटारा किया और उस दरिंदे को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई. वे खुद ही अपनी पीठ थपथपाएंगे, लेकिन क्या इससे Maharashtra में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों का ग्राफ कम होगा? यह एक बड़ा सवाल है.
शिवसेना ने आगे कहा कि राज्य में इस समय सत्ताधारियों ने भ्रष्टाचार, घोटालों, पेपर लीक और Political तोड़-फोड़ जैसी गतिविधियों ने कानून-व्यवस्था को चरमरा दिया है. महिलाओं और बच्चियों पर होने वाले अत्याचारों ने सारी हदें पार कर दी हैं. किसी जमाने में शिक्षा की नगरी माना जाने वाला पुणे आज महिला उत्पीड़न, दहेज प्रथा, `कोयता गैंग’, हत्याओं और गुंडागर्दी का केंद्र बन चुका है. Chief Minister के गृहनगर नागपुर में भी कानून-व्यवस्था के चीथड़े उड़ते दिखाई दे रहे हैं. पीड़ित महिलाओं की चीखें हर तरफ सुनाई दे रही हैं. जिन्हें ‘ईश्वर के घर के फूल’ कहा जाता है, वे मासूम बच्चियां इन दरिंदों की हवस और क्रूरता का शिकार हो रही हैं.
सामना में लिखा है कि हाल ही में भिवंडी तालुका के कशेली इलाके में एक सात साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न किया गया. कोल्हापुर में चॉकलेट का लालच देकर चार साल की मासूम को हवस का शिकार बनाया गया. पिंपरी-चिंचवड़ में एक इमारत के सुरक्षा गार्ड ने सोसायटी की छोटी बच्चियों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की. बदलापुर के एक नामी स्कूल में दो छोटी बच्चियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न ने पूरे Maharashtra में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया था. दो महीने पहले Mumbai के घाटकोपर में भी एक दरिंदे ने दो छोटी बच्चियों पर अत्याचार करने की कोशिश की थी. कल्याण के कोलशेवाड़ी में भी एक 55 वर्षीय अपराधी ने एक नाबालिग लड़की का उत्पीड़न किया. Government महिला उत्पीड़न के मामलों को लेकर पूरी तरह निष्क्रिय है और अपराधियों में कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है.
शिवसेना ने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में Maharashtra के भीतर छोटे बच्चों और बच्चियों के उत्पीड़न तथा हत्या के 23 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. यह आंकड़ा तो सिर्फ दर्ज हुए अपराधों का है. अगर उन घटनाओं पर गौर करें जो दर्ज ही नहीं हो पातीं, तो यह साफ हो जाता है कि राज्य में `पॉक्सो’ या अन्य कड़े कानूनों का कोई खौफ नहीं बचा है.
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ओपी/एएस
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