हिंदुस्तान जिंक की बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी 22%

उदयपुर। वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने अपनी कुल बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर ली है। वित्त वर्ष 2026 में यह हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत थी। कंपनी वित्त वर्ष 2028 तक अपनी कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 70 प्रतिशत रिन्यूएबल स्रोतों से प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक और शीर्ष दस सिल्वर उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक राजस्थान और उत्तराखंड स्थित अपनी इकाइयों में क्लीन एनर्जी क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है।

वित्त वर्ष 2026 में 892 मिलियन यूनिट ग्रीन एनर्जी उत्पादन

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 892 मिलियन यूनिट ग्रीन एनर्जी का उत्पादन किया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 632 मिलियन यूनिट था। ग्रीन एनर्जी उत्पादन और रिन्यूएबल एनर्जी बिजली की खरीद में वृद्धि के कारण कंपनी के कुल ऊर्जा मिश्रण में क्लीन एनर्जी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है।

वित्त वर्ष 2028 तक 70 प्रतिशत रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी ने सेरेंटिका रिन्यूएबल्स के साथ अपने राउंड-द-क्लॉक अक्षय ऊर्जा आपूर्ति समझौते को 450 मेगावाट से बढ़ाकर 530 मेगावाट कर दिया है।

इसके साथ ही कंपनी राज्य ट्रांसमिशन नेटवर्क से केंद्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क की ओर कनेक्टिविटी अपग्रेड कर रही है। कंपनी ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, वेस्ट हीट रिकवरी बॉयलर की क्षमता में सुधार और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स जैसे कई नवाचारों पर भी काम कर रही है।

सौर, पवन और स्टोरेज का मिश्रण

कंपनी का रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण (स्टोरेज) समाधानों का मिश्रण है, जिससे उसके संचालन को चौबीसों घंटे स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली मिलती है। आने वाले समय में अतिरिक्त क्षमता जुड़ने के साथ रिन्यूएबल एनर्जी का योगदान और बढ़ने की उम्मीद है।

हिंदुस्तान जिंक के CEO अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि धातु एवं खनन उद्योग के विकास का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए अधिक उत्पादन कैसे किया जाए।

उन्होंने कहा कि कंपनी की कुल बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी अब 22 प्रतिशत हो चुकी है और इसे वित्त वर्ष 2028 तक 70 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उनके अनुसार, क्लीन एनर्जी केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और जिम्मेदार व्यवसाय बनाने का आधार भी है।

उन्होंने कहा कि कंपनी जिम्मेदार खनन का नया मानक स्थापित करना चाहती है, जहां विकास, तकनीक और स्थिरता साथ-साथ आगे बढ़ें। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विकसित भारत के लक्ष्य में भी योगदान दिया जा रहा है।

स्वच्छ परिवहन और नई ऊर्जा तकनीकों पर भी जोर

कंपनी का स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता कदम उसके दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों से भी जुड़ा हुआ है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हिंदुस्तान जिंक अपने परिचालन की कार्बन तीव्रता को कम करने पर भी ध्यान दे रही है।

रिन्यूएबल एनर्जी के अलावा कंपनी स्वच्छ परिवहन और नई ऊर्जा तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है। हिंदुस्तान जिंक ने अपने परिचालन में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाया है और हाल ही में राजस्थान स्थित जिंक स्मेल्टर देबारी में भारत की पहली 250 टन क्षमता वाली इलेक्ट्रिक क्रेन तैनात की है।

इसके अतिरिक्त, कंपनी ने एडवेंटेक एसोसिएट्स LLP और एयरो ईगल ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ MoU किया है। इसके तहत भूमिगत खनन, भारी मशीनरी, वाहनों और अन्य परिचालन उपकरणों में ग्रीन हाइड्रोजन तथा वैकल्पिक स्वच्छ ऊर्जा समाधानों की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।

नेट जीरो लक्ष्य को मिलेगा समर्थन

ये सभी प्रयास हिंदुस्तान जिंक की व्यापक सस्टेनेबिलिटी रणनीति का हिस्सा हैं और कंपनी के Science Based Targets Initiative द्वारा मान्य नेट जीरो 2050 या उससे पहले के लक्ष्य को समर्थन देते हैं।

कंपनी को S&P Global Corporate Sustainability Assessment में दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल एवं माइनिंग कंपनी का दर्जा प्राप्त है और वह International Council on Mining and Metals की सदस्य भी है।

हिंदुस्तान जिंक अपने अगले विकास चरण और मल्टी-मेटल भविष्य की ओर बढ़ते हुए क्लीन एनर्जी को अपनी रणनीति के केंद्र में रख रही है, ताकि भारत की विकास यात्रा और वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के लिए आवश्यक धातुओं का उत्पादन अधिक जिम्मेदार और सस्टेनेबल तरीके से किया जा सके।