शरीर पर सात चोटों ने बढ़ाई ट्विशा शर्मा मौत मामले की गंभीरता, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर बोले एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह

जबलपुर, 28 मई . Madhya Pradesh के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रशांत सिंह ने Thursday को कहा कि हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की मौत के मामले की सुनवाई करते हुए कई अहम पहलुओं पर गौर किया, जिनमें पीड़िता के शरीर पर मृत्यु-पूर्व चोटों के सात निशान मौजूद हैं

से ​​बात करते हुए प्रशांत सिंह ने कहा कि एक याचिका दायर की गई थी जिसमें आरोपी सास गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी.

एडवोकेट जनरल ने कहा, “कल इस मामले में विस्तार से सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने जिन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया, उनमें से एक यह था कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर सात चोटें पाई गई थीं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि जांच टीम ने गिरिबाला सिंह को कई नोटिस जारी किए थे, लेकिन आरोप है कि उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला.

सिंह ने को बताया, “अग्रिम जमानत देते समय अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि वह जांच में सहयोग करेंगी. हालांकि, जांच टीम को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला.”

एडवोकेट जनरल ने यह भी बताया कि First Information Report में आरोपी के खिलाफ क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं.

उन्होंने कहा, “First Information Report में साफ तौर पर लिखा है कि ट्विशा शर्मा के साथ क्रूरता की गई थी. उनकी अप्राकृतिक मृत्यु छह महीने के भीतर हो गई, जिससे यह कथित तौर पर दहेज मृत्यु का मामला बन जाता है. First Information Report में दहेज की मांग से जुड़े आरोप भी शामिल हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान भी शिकायत में लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हैं.

Madhya Pradesh के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रशांत सिंह ने कहा, “अगर वाट्सअप चैट की जांच की जाए, तो उनसे ट्विशा शर्मा द्वारा झेली गई दहेज से जुड़ी क्रूरता के और भी सबूत सामने आ सकते हैं.”

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, Madhya Pradesh हाईकोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को उनकी बहू ट्विशा शर्मा की दहेज मृत्यु के मामले में दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है.

Wednesday को दिए गए इस आदेश में, निचली अदालत द्वारा 15 मई के आदेश के जरिए दी गई राहत को रद्द कर दिया गया. अदालत ने यह पाया कि जमानत देते समय केस डायरी और गवाहों के बयानों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया था.

जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने Bhopal की एक सत्र अदालत द्वारा पहले दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया. उन्होंने पाया कि निचली अदालत केस डायरी, गवाहों की गवाही और वाट्सअप बातचीत जैसे महत्वपूर्ण सबूतों की पर्याप्त जांच करने में विफल रही थी.

हाईकोर्ट ने मामले की समीक्षा करने के बाद पाया कि इस आदेश में गंभीर कमियां थीं. पीठ ने पाया कि निचली अदालत ने केस डायरी में मौजूद गवाहों की महत्वपूर्ण गवाही और दस्तावेजी सबूतों को नजरअंदाज कर दिया था, जो सिंह की कथित संलिप्तता की ओर इशारा कर रहे थे.

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