जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 17 से 31 अगस्त तक भरे जाएंगे जनगणना 2027 के स्व-गणना फॉर्म

जम्मू, 16 अगस्त . जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में आगामी जनगणना 2027 के लिए 17 अगस्त से ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ यानी खुद जानकारी भरने की सुविधा शुरू होगी. यह सुविधा 31 अगस्त तक ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी. मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने यह जानकारी दी.

अमित शर्मा ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा, “हम पूरी तरह तैयार हैं. यह जनगणना का सबसे अहम चरण है, जिसे हम ‘जनसंख्या गणना’ कहते हैं. इसमें हमें पूरी जानकारी और अलग-अलग पैरामीटर मिलते हैं. इसमें लगभग 40 सवाल हैं, जिनमें पूरी डेमोग्राफिक जानकारी, फर्टिलिटी, काम धंधे और दूसरे कई पहलुओं से जुड़े सवाल शामिल हैं. इस बार जाति को भी जोड़ा गया है.”

उन्होंने बताया कि लगभग 40 कैटेगरी पहले ही नोटिफाई की जा चुकी थीं, जिन्हें अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए फिर से नोटिफाई और पब्लिश किया गया है. इसका मतलब है कि 17 अगस्त से लोग इन 40 सवालों के जवाब खुद ऑनलाइन भर सकेंगे.

मुख्य जनगणना अधिकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के 16 जिले ऐसे हैं जहां भारी बर्फबारी होती है. इन जिलों में पहले ही पॉपुलेशन एन्यूमरेशन कराया जाएगा, क्योंकि सितंबर-अक्टूबर के बाद पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.

लद्दाख को लेकर उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब लद्दाख की स्वतंत्र जनगणना हो रही है. 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख को अपना पहला आधिकारिक डेटा मिलेगा. लद्दाख पूरी तरह बर्फबारी वाला क्षेत्र है. इसमें लेह और कारगिल दोनों जिले शामिल हैं.

अमित शर्मा ने बताया, “1 से 30 सितंबर के बीच जब जनगणना होगी तो लद्दाख देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा, जहां जनगणना पूरी हो जाएगी. लद्दाख की नोटिफाई डेट 1 अक्टूबर 2026 रहेगी.”

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिला प्रभारी और फील्ड स्टाफ जगह-जगह जाकर लोगों को सेल्फ-एन्यूमरेशन की प्रक्रिया समझा रहे हैं. ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें.

अधिकारी ने उम्मीद जताई कि समय पर शुरू की गई इस प्रक्रिया से बर्फबारी वाले क्षेत्रों की गिनती सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे 17 से 31 अगस्त के बीच पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी खुद दर्ज करें. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी.

एससीएच/डीकेपी