कश्मीर में आतंक की चौतरफा चुनौती पर प्रहार में ऐसे जुटीं सुरक्षा एजेंसियां

जम्मू (Jammu) . कश्मीर में आतंक पर सुरक्षा बलों के तगड़े प्रहार के बीच एजेंसियों को चौतरफा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. आतंकी गुट लगातार नए-नए तरीकों से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश में जुटे हैं. बिना प्रशिक्षण के कट्टरपंथ के जरिये ब्रेनवाश कर युवाओं को छोटे हथियार थमाकर हमले कराए जा रहे हैं. पीओके में नए आतंकी लांचिंग पैड बनाए गए हैं. घुसपैठ के नए मार्ग भी चिन्हित किए गए हैं.

आईएसआई को चीन की ओर से मिल रही शह और तालिबान की नई चुनौती के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां बड़े खतरे को भांपकर आतंकियो के खिलाफ सघन अभियान चला रही हैं. अधिकारियों ने कहा, सुरक्षाबल व कई एजेंसियां एनआईए,सीबीआई,ईडी आदि मिलकर आतंक पर प्रहार में जुटी हैं. आतंकवाद पर दुनिया के सामने बेनकाब हो चुकी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की शह से आतंकी गुट नाम बदलकर नई रणनीति अपना रहे हैं. पीओके में लश्कर के ही एक नया संस्करण अल बर्क के रूप में सामने आया है. जबकि जैश की गतिविधियों को संचालित करने के लिए अल उमर मुजाहिदीन नाम से संगठन खड़ा किया गया है. जम्मू-कश्मीर में सक्रिय ‘द रेजिस्टेंस फोर्स’ भी लश्कर का ही बदला नाम है. हुर्रियत के कमजोर पड़ने की वजह से जमात व अन्य कट्टरपंथी गुट नया संगठन खड़ा करने में भी जुटे हैं. आतंकी संगठनों द्वारा आम लोगों व गैर मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश भी घाटी में नया ट्रेंड दिखाने की कोशिश है. अधिकारियों का कहना है कि बिना प्रशिक्षण और बिना प्रोफेशनल हथियार के युवाओं द्वारा हमले करवाकर आतंकी गुट इसे आतंकवाद के बजाय स्थानीय विद्रोह दिखाना चाहते हैं. आमतौर पर ओजीडब्लू के तौर पर काम करने वाले मददगारों को हमले के लिए आगे लाया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ा खतरा चीन और तालिबान के तालमेल से पाकिस्तानी साजिश से लग रहा है. एक अधिकारी के मुताबिक चीन की ओर से हथियार,ड्रोन आदि आईएसआई को दिए जाने के पुख्ता इनपुट एजेंसियों को मिले हैं. साथ ही पिछले कुछ महीनों में तालिबानी लड़ाकों का मूवमेंट भी चिंता का विषय रहा है. दरअसल एलएसी पर तनाव के बाद से चीन पाकिस्तान के जरिये भारत की चुनौती कश्मीर में बढ़ाना चाहता है.

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