एससी-एसटी समुदाय ने भाजपा पर जताया विश्वास, जमकर की वोटिंग: अमित मालवीय

New Delhi, 6 मई . भाजपा नेता और आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी की जीत पर खुशी जताई. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है.

अमित मालवीय ने कहा कि इन चुनावों में हमने जो देखा है, वह केवल चुनावी रुझान नहीं, बल्कि एक सामाजिक फैसला है. सभी राज्यों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों ने स्पष्टता और दृढ़ विश्वास के साथ अपनी बात रखी है और उन लोगों को नकार दिया है जिन्होंने उन्हीं की नेता, President द्रौपदी मुर्मु का अपमान करते हुए उन्हें संरक्षण देने की कोशिश की. पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2026 के नतीजों से आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक Political बदलाव आया है. 68 अनुसूचित जाति सीटों में से भाजपा ने 51 (75 फीसदी) सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को केवल 17 सीटें मिलीं, जो दलितों के समर्थन में स्पष्ट मजबूती का संकेत है.

भाजपा नेता ने कहा कि अनुसूचित जनजाति सीटों में तो बदलाव और भी तेज हुआ है. भाजपा ने सभी 16 सीटों पर जीत हासिल की, जो उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे आदिवासी क्षेत्रों में एकसमान जनादेश को दर्शाती है. भाजपा ने 84 अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति सीटों में से 67 सीटें जीतीं, जिससे टीएमसी की सीटें घटकर 17 रह गईं और अन्य सभी दल का लगभग सफाया हो गया. कभी खंडित और विवादित आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र भी अब भाजपा के प्रभुत्व का स्तंभ बन गए हैं. यह परिणाम ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समूहों के बीच गहरी सामाजिक पैठ को दर्शाता है. विशेषकर सीमावर्ती जिलों में मतुआ समुदाय के मजबूत होने से इस बढ़त को और बल मिला.

अमित मालवीय ने कहा कि असम में भाजपा और उसके सहयोगियों ने आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है. अनुसूचित जाति की 9 सीटों में से भाजपा ने 5 सीटें जीतीं, जबकि एनडीए ने 8 सीटें अपने नाम कीं, जिससे कांग्रेस को केवल एक सीट मिली. अनुसूचित जनजाति की 19 सीटों में से भाजपा ने 13 सीटें जीतीं और एजीपी और बीपीएफ जैसे सहयोगियों के साथ एनडीए ने सभी 19 सीटों पर जीत हासिल की. परिसीमन ने संरचनात्मक भूमिका निभाई, जिससे अनुसूचित जनजाति की सीटें 16 से बढ़कर 19 और अनुसूचित जाति की सीटें 8 से बढ़कर 9 हो गईं, जिससे स्वदेशी और आदिवासी प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई. सहयोगियों के साथ मजबूत समन्वय और ऊपरी असम और पहाड़ी क्षेत्रों में निरंतर जनसंपर्क ने इस व्यापक जीत को सुनिश्चित किया.

भाजपा नेता ने कहा कि यह गति दक्षिण में भी जारी रही. एनडीए की सहयोगी एआईएडीएमके ने तमिलनाडु में अनुसूचित जाति की 46 आरक्षित सीटों में से 9 और अनुसूचित जनजाति की 2 सीटों में से 1 सीट जीती.

पुडुचेरी में एनडीए की सहयोगी एआईएनआरसी ने अनुसूचित जाति की 5 आरक्षित सीटों में से 2 सीटें जीतीं.

यह महज आंकड़े नहीं, बल्कि एक संदेश है. जिन समुदायों की आवाज लंबे समय से दबी हुई थी, वे अब खुद अपनी आवाज उठा रहे हैं. President द्रौपदी मुर्मु का अपमान भुलाया नहीं गया है, और अब चुनाव इसका जवाब देने का जरिया बन गया है. अनुसूचित जनजाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता न केवल Political विस्तार को दर्शाती है, बल्कि आकांक्षाओं, गरिमा और प्रतिनिधित्व के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है.

ओपी/डीकेपी