
Mumbai , 3 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को Mumbai में ‘जेन जी’ और ‘जेनरेशन अल्फा’ के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे.
यह बातचीत का सत्र ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (आईआईएमयूएन) के 15वें सालाना चैंपियनशिप सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के तौर पर आयोजित किया जाएगा.
इस कार्यक्रम में India के 100 से ज्यादा शहरों से 15 से 19 साल की उम्र के 2,000 से ज्यादा हाईस्कूल छात्र शामिल होंगे. एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘दुनिया को एकजुट करने में युवाओं की भूमिका: भारतीय तरीका’ (द रोल ऑफ यूथ इन यूनाइटिंग द वर्ल्ड, द इंडियन वे) थीम पर आधारित यह सम्मेलन युवा नेताओं को स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अहम मुद्दों पर चर्चा करने का मंच देता है.
भागवत का संबोधन सालाना चैंपियनशिप सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत करेगा, जिसके बाद कई दिनों तक छात्रों के नेतृत्व में बहस और नीतिगत चर्चाएं होंगी. आईआईएमयूएन संस्थापक ऋषभ शाह ने आपसी बातचीत के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लीडरशिप का मतलब सिर्फ अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन करना ही नहीं, बल्कि उनकी बात सुनना भी है.
उन्होंने कहा कि India की यात्रा के इस अहम मोड़ पर, हमें इस बातचीत की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है.
आरएसएस चीफ की बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन किया और एजुकेशन सेक्टर में सुधार की मांग की.
यह आंदोलन Government के भरोसे, पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) अमेंडमेंट बिल, 2026 के पास होने और एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ.
अपने हालिया भाषण में, भागवत ने जेनजी को स्वाभाविक रूप से अच्छा, ढलने वाला और इमोशनल बताया, लेकिन कहा कि वे अक्सर बिना सोचे-समझे ‘शांत दिमाग’ से रिएक्ट करते हैं.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा लोग आसानी से उन वजहों या ट्रेंड्स की तरफ खिंचे चले आते हैं जो ‘साफ तौर पर असली’ लगते हैं, जो सोशल और पॉलिटिकल मूवमेंट्स में उनकी हिस्सेदारी को मजबूती से तय करते हैं.
उन्होंने ऊपर से नीचे तक की अथॉरिटी के बजाय परिवार में खुली बातचीत की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि ‘बात मानने का जमाना’ खत्म हो गया है.
उन्होंने परिवारों को सलाह दी कि वे हुक्म देने के बजाय चर्चा करें, और असली बातचीत से आम सहमति बनाएं. उन्होंने मोबाइल डिसिप्लिन के लिए मजबूत दलील देते हुए स्क्रीन की लत पर गंभीर चिंता जताई.
आरएसएस चीफ ने सुझाव दिया कि माता-पिता को डिजिटल लाइफस्टाइल की आदतों को मैनेज करने के लिए सिर्फ कानूनों या सरकारी नियमों पर निर्भर रहने के बजाय खुद social media का इस्तेमाल कम करके सबसे पहले इस व्यवहार को अपनाना चाहिए.
जेनजी के साथ भागवत की बातचीत इसलिए भी जरूरी है क्योंकि Prime Minister Narendra Modi ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान युवा प्रदर्शनकारियों द्वारा उन पर और उनकी गुजर चुकी मां पर की गई ‘गलत बातों’ पर एक वीडियो मैसेज जारी किया था.
बदले की कार्रवाई के बजाय गाइडेंस की अपील करते हुए Prime Minister ने जनता से अपील की कि वे गुस्से से आगे बढ़ें और कानूनी लड़ाई या सामाजिक बहिष्कार के बजाय गुमराह युवाओं को गाइड करें.
पीएम मोदी ने साफ-साफ कहा कि मैं उन लोगों को माफ करना चाहता हूं जिन्होंने मेरे साथ बुरा बर्ताव किया. मैं समाज से गुजारिश करता हूं कि वे मेरा फैसला मानें.
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एमएस/पीएम
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