कोई पुरानी बात नहीं है सचिन पायलट और अशोक गहलोत की तकरार ! · Indias News

कोई पुरानी बात नहीं है सचिन पायलट और अशोक गहलोत की तकरार !


नई दिल्ली (New Delhi). यह कोई पुरानी बात नहीं है जब कांग्रेस पार्टी के युवा और ऊर्जावान नेताओं से लोकसभा (Lok Sabha) भरा हुआ रहता था. इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, जितिन प्रसाद, संदीप दिक्षित और राहल जैसे लोग शामिल थे. यह नए जमाने की कांग्रेस थी, जिसने अपने दिग्गज नेताओं के साथ यूथ पावर की ब्रांडिंग की. लेकिन धीरे-धीरे स्थिति काफी बदल गई. मध्य प्रदेश के दिग्गज और ऊर्जावान नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ना सिर्फ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की, बल्कि अपने समर्थक विधायकों के बल पर वर्षों बाद एमपी की सत्ता में आई कांग्रेस की सरकार (Government) को भी गिरा दिया.

सिंधिया एमपी की राजनीति में खुद को दरकिनार महसूस कर रहे थे. महाराष्ट्र (Maharashtra) में कांग्रेस के युवा चेहरा मिलिंद देवड़ा ने भी हाल में मुंबई (Mumbai) कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. इतना ही नहीं कई अन्या युवा नेता भी आजकल चर्चा में नहीं हैं. मध्य प्रदेश में जब 2018 में कांग्रेस पार्टी की जीत मिली थी, इसका श्रेय ज्योतिरादित्य सिंधिया की रणनीति को दिया गया, लेकिन दो साल बीत गए उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनाया गया. इसी साल मार्च में उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया. वहीं, राजस्थान (Rajasthan) की बात करें तो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का श्रेय सचिन पायलट को दिया गया. राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री (Chief Minister) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने अपने आवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई तो इसमें सचिन पायलट ने हिस्सा नहीं लिया.

पायलट के बागी तेवर से हरकत में आई कांग्रेस पार्टी ने स्थिति को संभालने के लिए दो वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला और अजय माकन को राजस्थान (Rajasthan) भेज दिया. हाल के राज्यसभा चुनाव में एक युवा नेता, जिन्होंने एक प्रवक्ता के रूप में विश्वसनीय काम किया था. कांग्रेस के एक प्रमुख प्रकोष्ठ की अध्यक्षता भी की थी- को एक दिग्गज नेता को ऊपरी सदन में भेजने के लिए अनदेखी झेलनी पड़ी. अप्रैल 2019 में प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी. वह दुर्व्यवहार करने वाले नेताओं को वापस पार्टी में लाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व से नाराज थी. प्रियंका बाद में शिवसेना में शामिल हो गई. इससे पहले असम में हिमंत बिस्वा शर्मा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता तरुण गोगोई के साथ अपने मतभेदों के कारण कांग्रेस पार्टी का दामन छोड़ दिया. पार्टी के एक रणनीतिकार ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘ऐसे कई मामले हुए हैं जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने युवा नेताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया.’

एक अन्य नेता ने कहा कि 2014 के लोकसभा (Lok Sabha) चुनाव में राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले एक महासचिव ने युवा नेताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया. वहीं, कांग्रेस के एक वर्ग का यह भी मानना है कि कुछ युवा नेता पार्टी की संभावनाओं को बढ़ाने में विफल रहे हैं. पार्टी के अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि अशोक तंवर हरियाणा (Haryana) (Haryana) के प्रभारी थे. लेकिन, कांग्रेस कोई भी बड़ा चुनाव जीतने में विफल रही. इसी तरह मिलिंद देवड़ा मुंबई (Mumbai) कांग्रेस अध्यक्ष थे, लेकिन पार्टी शहर की सभी सीटें हार गई. पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कांग्रेस ने युवा नेताओं को बढ़ावा दिया है. जब सचिन पायलट 26 साल के थे, तब सांसद (Member of parliament) बने. 34 साल की उम्र में उन्हें केंद्रीय मंत्री, 35 साल की उम्र में का राजस्थान (Rajasthan) कांग्रेस का अध्यक्ष और 40 साल की उम्र में उपमुख्यमंत्री (Chief Minister) बनाया गया. अतीत में भी कांग्रेस ने उन प्रमुख युवा नेताओं का पलायन देखा है, जिन्हें दरकिनार कर दिया गया था.

ममता बनर्जी ने 1988 में कांग्रेस के एक दिग्गज नेता के साथ झगड़े के बाद पार्टी छोड़ दी थी. बाद में वह पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री (Chief Minister) बनीं. इसी तरह, वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भी दरकिनार किए जाने के कारण कांग्रेस छोड़ दी और 2009 में पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद अपनी पार्टी बना ली. कांग्रेस के एक युवा नेता जो पार्टी के लिए कानूनी मामलों का काम देखते हैं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘जब कांग्रेस पार्टी ने 2015 में दिल्ली में भूमि अधिग्रहण अधिनियम के खिलाफ रैली निकाली तो कई युवा नेताओं ने इसकी अगुवाई की थी. लेकिन तीन-चार दिग्गज नेताओं ने ही रैली को सफल बनाने के लिए संसाधन और लोगों की व्यवस्था की थी.

Check Also

आयुध निर्माणी कर्मचारी संघ कोरवा युनियन अमेठी ने निगमीकरण के विरोध में कमर कसी

केन्द्र सरकार के द्वारा देश के सभी आयुध निर्माणीयो का निगमीकरण किए जाने का विरोध …