एस जयशंकर ने विक्रम-1 के सफल लॉन्च पर दी बधाई, विदेश मंत्रालय ने बताया भारत के नए स्पेस युग की शुरुआत

New Delhi, 18 जुलाई . India का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ Saturday को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया. इसके साथ ही निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च करने की क्षमता हासिल करने वाला India दुनिया का तीसरा देश बन गया. विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने India की इस ऐतिहासिक सफलता की बधाई दी. वहीं विदेश मंत्रालय ने कहा कि India के अगले स्पेस युग की शुरुआत हुई.

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “India की स्पेस महत्वाकांक्षाएं नई ऊंचाइयों पर! आज स्काईरूट एयरस्पेस द्वारा India के पहले प्राइवेट तौर पर डेवलप किए गए लॉन्च व्हीकल, विक्रम-1 का सफल लॉन्च, सच में ऐतिहासिक है. यह दिखाता है कि जब India के युवाओं के इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप ड्राइव को पीएम Narendra Modi के विजन के बड़े सुधारों का साथ मिलता है, तो क्या हासिल किया जा सकता है.”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा, “India का अगला स्पेस युग शुरू हो गया है. स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा India के पहले प्राइवेट तौर पर डेवलप किए गए लॉन्च व्हीकल विक्रम1 का सफल लॉन्च India की स्पेस यात्रा के लिए एक अहम पड़ाव है. यह उपलब्धि India के स्पेस सेक्टर में सुधारों की ताकत और हमारे युवाओं की एंटरप्रेन्योरशिप की भावना, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे को दिखाती है.”

‘विक्रम-1’ ने अंतरिक्ष में अपनी तय कक्षा (ऑर्बिट) सफलतापूर्वक हासिल कर ली है. इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही भारत, निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च (कक्षीय प्रक्षेपण) की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है.

इस रॉकेट को हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने विकसित किया है. स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ से पोस्ट करते हुए बताया, “India के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ (टेस्ट फ्लाइट-1) ने अंतरिक्ष में अपनी तय कक्षा (ऑर्बिट) सफलतापूर्वक हासिल कर ली है. रॉकेट ने अपने अंतिम बर्न (ईंधन दहन चरण) को पूरा करते हुए पेलोड्स को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर दिया. इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही भारत, निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च (कक्षीय प्रक्षेपण) की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है.”

विक्रम-1 में तीन सॉलिड-फ्यूल चरण और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाए गए हैं. मिशन का उद्देश्य 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 60 डिग्री के झुकाव वाली 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित करना है.

एएस