झारखंड के छात्र आंदोलन और अन्य मुद्दों पर घमासान, सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

New Delhi, 11 अगस्त . संसद की कार्यवाही, Jharkhand में छात्रों के आंदोलन पर Police कार्रवाई, Government की जवाबदेही और सदन में विपक्ष की मांगों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली. BJP MP दिलीप सैकिया ने जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सदन में चर्चा से बचने और मुद्दे से भागने का आरोप लगाया. वहीं, कांग्रेस और Samajwadi Party के नेताओं ने Government पर युवाओं और छात्रों की आवाज दबाने तथा संसद में जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया.

BJP MP दिलीप सैकिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश और संसद में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और बातचीत करना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रुख सुबह और शाम अलग-अलग होता है और वास्तव में वह सदन में चर्चा नहीं चाहते. राहुल गांधी को Jharkhand के घटनाक्रम की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि Jharkhand में Jharkhand मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की Government कांग्रेस के समर्थन से चल रही है. राज्य Government पर छात्रों और युवाओं के साथ कथित तौर पर अत्याचार करने के आरोप लग रहे हैं.

BJP MP ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में यदि असामाजिक तत्व शामिल हुए थे, तो Government ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी. हालांकि, Jharkhand में चल रहे आंदोलन को उन्होंने छात्रों और युवाओं का आंदोलन बताया. छात्र अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और यह आंदोलन करीब 17 दिनों से जारी है. छात्रों और युवाओं को उनके उचित अधिकार नहीं मिलने के कारण वे राज्य Government के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

दिलीप सैकिया ने असम में बाढ़ की स्थिति का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्से बाढ़ से प्रभावित हैं. खासतौर पर शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में स्थिति प्रभावित हुई है. उन्होंने बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र दर्रांग में भी बाढ़ का असर पड़ा है. बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता और राहत एवं पुनर्वास कार्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से लोगों ने Chief Minister राहत कोष में योगदान दिया है. बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा Chief Minister राहत कोष में दिया है, ताकि Government प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचा सके.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और एआईसीसी सदस्य मुकुल वासनिक ने संसद में विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों का बचाव किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सामने तीन मांगें रखी हैं और Government से इन पर जवाब मांगा है. इन मांगों को लेकर देश में चिंता है और लोग Government के रुख का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भले ही किसी राज्य विशेष से जुड़े मुद्दे को सामने रखकर चर्चा का केंद्र बदलने की कोशिश करे, लेकिन इससे देश के सामने मौजूद बड़े सवालों से ध्यान नहीं हटाया जा सकता. अगर Government राज्य विशेष के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है तो वह इसमें सफल नहीं होगी.

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने Jharkhand में ‘विधानसभा घेराव’ मार्च के दौरान छात्रों पर हुई Police कार्रवाई को लेकर Government पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि प्रदर्शन में भारतीय जनता युवा मोर्चा या एबीवीपी से जुड़े लोग हो सकते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि इससे क्या फर्क पड़ता है. मुद्दा यह है कि क्या शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को दबाया जाना चाहिए. उन्होंने Government पर युवाओं का सामना करने से डरने का आरोप लगाया.

पवन खेड़ा ने दावा किया कि राहुल गांधी प्रदर्शनकारी छात्रों के संपर्क में हैं और कांग्रेस की मंत्री दीपिका पांडे सिंह भी लगातार उनसे मुलाकात कर रही हैं. उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि उसके कितने मंत्री जंतर-मंतर पहुंचे और क्या Prime Minister या गृह मंत्री वहां गए. उन्होंने कहा कि जो लोग सदन में आने की हिम्मत नहीं करते, वे अब विपक्ष पर आक्रामक होने का आरोप लगा रहे हैं.

Samajwadi Party के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि संसद में दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने Jharkhand में छात्रों और युवाओं के साथ Police के कथित व्यवहार का मुद्दा उठाया और कहा कि लाठीचार्ज तथा पैलेट गन के इस्तेमाल की तस्वीरें सामने आई हैं. अखिलेश यादव ने अयोध्या से जुड़े दूसरे मुद्दे पर भी चर्चा की मांग की. उन्होंने सवाल उठाया कि इन घटनाओं के पीछे आखिर मास्टरमाइंड कौन हैं. दोनों मुद्दों पर विस्तृत बहस होनी चाहिए, क्योंकि चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि इन घटनाओं के पीछे क्या कारण थे और कौन जिम्मेदार है.

उन्होंने Government की ओर से बातचीत के लिए कथित तौर पर देर से तैयार होने पर भी सवाल उठाया. यदि चर्चा के लिए केवल दो दिन उपलब्ध हैं तो दोनों मुद्दों पर एक-एक दिन बहस की जा सकती है.

Samajwadi Party की सांसद डिंपल यादव ने Jharkhand में छात्रों के आंदोलन को लेकर कहा कि बातचीत और चर्चा के माध्यम से छात्रों की बाकी मांगों को भी स्वीकार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी Jharkhand Government और Chief Minister से छात्रों के साथ बातचीत करने का आग्रह कर रही है. छात्रों की ज्यादातर मांगें Jharkhand Government मान चुकी है और जो मांगें बाकी हैं, उन्हें छात्रों और राज्य Government के बीच बातचीत से हल किया जाना चाहिए. Government और Chief Minister को छात्रों की मांगें सुननी चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए.

डिंपल यादव ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए परीक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों से जुड़े मुद्दे उठाए. उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 20-21 परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं और हजारों प्राथमिक स्कूल बंद किए गए हैं. उन्होंने सवाल किया कि स्कूलों और उनकी फंडिंग के लिए आवंटित पैसा आखिर कहां जा रहा है. शिक्षा और युवाओं से जुड़े इन मुद्दों पर भी Government को जवाब देना चाहिए.

संसद की कार्यवाही को लेकर डिंपल यादव ने Government पर गतिरोध के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि केंद्रीय गृह मंत्री सदन में आएं और अपनी जिम्मेदारी निभाएं. उन्होंने 20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि हजारों छात्र घायल हुए थे. उन्होंने Police कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि महिलाओं तथा लड़कियों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार हुआ. Jharkhand में छात्रों पर Police कार्रवाई को उन्होंने निंदनीय बताते हुए राज्य Government से छात्रों के साथ बातचीत करने की अपील की.

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी संसद में गृह मंत्री की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष और राहुल गांधी लगातार मांग कर रहे हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं और अपनी जिम्मेदारियां निभाएं. भगत ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री और Prime Minister सदन में पर्याप्त रूप से मौजूद नहीं हैं और Government को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. Government की जवाबदेही से बचने की स्थिति संसद की गरिमा के भी खिलाफ है.