
Mumbai , 3 जून . एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने Wednesday को से बातचीत के दौरान राज्य Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले Government ने ‘लाडकी बहिन योजना’ के तहत करीब ढाई करोड़ महिलाओं को पैसे बांटे थे और अब उन्हीं में से लाखों महिलाओं को अपात्र ठहरा दिया है.
रोहित पवार ने कहा कि आज आम जनता, खासकर महिलाएं, महंगाई और सरकारी नीतियों से परेशान हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले Government ने ‘लाडकी बहिन योजना’ की घोषणा की थी, जिसका मकसद जनता को प्रभावित करना था. उन्होंने कहा कि शुरुआत में इस योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को लाभ दिया गया और चुनाव से पहले कुछ महीनों का एडवांस भुगतान भी किया गया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही लाखों लाभार्थियों के नाम सूची से हटने लगे. रोहित पवार का कहना है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या यह योजना वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए थी या फिर सिर्फ चुनावी रणनीति का हिस्सा.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, वैसे ही Government का रवैया बदल जाता है. चुनाव के दौरान जनता से अपनापन दिखाने वाली Government बाद में जनता की समस्याओं से दूरी बना लेती है. उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में महिलाएं इसका जवाब जरूर देंगी.
महंगाई के मुद्दे पर बोलते हुए रोहित पवार ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कई इलाकों में पेट्रोल की कीमतें 110 से 112 रुपए प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी हैं, जबकि डीजल भी 100 रुपए के करीब है. इसके साथ ही घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ रहा है.
उन्होंने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का भी मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि छोटे व्यवसाय जैसे वड़ा पाव स्टॉल, पोहा विक्रेता, चाय की दुकानें और छोटे रेस्टोरेंट इस बढ़ती लागत से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. जब उनकी लागत बढ़ती है तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है, क्योंकि खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं.
रोहित पवार ने यह भी कहा कि महंगाई का असर सिर्फ व्यापारियों पर नहीं, बल्कि हर वर्ग पर पड़ रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे कोई सैलरी पाने वाला कर्मचारी हो, Police constable हो या फिर आईटी सेक्टर में काम करने वाला व्यक्ति, सभी पर बढ़ती कीमतों का असर पड़ रहा है, जबकि उनकी आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही.
उन्होंने Government पर आरोप लगाया कि वह आम जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय Political गतिविधियों में अधिक व्यस्त है.
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पीआईएम/डीकेपी
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