पारसी समुदाय से बोले रिजिजू, ‘भारत अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित देश’

Mumbai , 9 मई . अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने Saturday को राष्ट्रीय विकास में पारसी समुदाय के योगदान की सराहना की. उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय की विरासत को संरक्षित करने, सामाजिक-आर्थिक कल्याण को बढ़ावा देने और उनकी आबादी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए Government की प्रतिबद्धता को दोहराया.

यशवंतराव चव्हाण केंद्र में ‘आधुनिक India में पारसी: सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक पथों पर अग्रसर’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते हुए, रिजिजू ने अवेस्ता भाषा के पुनरुद्धार के लिए Government के प्रयासों और घटती पारसी आबादी के मुद्दे को संबोधित करने के उपायों पर विस्तार से बताया.

Union Minister ने कहा कि मैं पारसी समुदाय को बताना चाहता हूं कि India अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित देश है, और हम (भारत) तेजी से विकास कर रहे हैं और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहे… हम ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर बढ़ रहे हैं. मैं आपको बताना चाहता हूं कि अल्पसंख्यक देश में सुरक्षित हैं.

उन्होंने पारसी समुदाय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए याद दिलाया कि कैसे टाटा परिवार ने India की 1920 की ओलंपिक टीमों को प्रायोजित किया था और कैसे पारसियों ने 1880 के दशक में पहली भारतीय क्रिकेट टीम मैदान में उतारी थी.

उन्होंने India की औद्योगिक और आर्थिक नींव के निर्माण में समुदाय के अपार योगदान की भी प्रशंसा की.

रिजिजू ने कहा कि यह सिर्फ संख्या की बात नहीं है; मायने तो प्रभाव रखता है. Government हर समुदाय को महत्व देती है और Prime Minister Narendra Modi के आदर्श वाक्य, ‘सबका साथ, सबका विकास’ का पालन करती है, जिसे उनके तीसरे कार्यकाल में ‘सबका विश्वास’ और ‘सबका प्रयास’ के साथ और मजबूत किया गया है.

उन्होंने जियो पारसी योजना पर समुदाय से सुझाव भी आमंत्रित किए.

अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि आज पारसी समुदाय को विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर जनसंख्या स्थिरता के संबंध में.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हाल ही में हुई चर्चाओं ने घटती जनसंख्या और बदलते सामाजिक स्वरूप जैसी चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है. ये जटिल मुद्दे हैं जिनके लिए नीतिगत समर्थन और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी दोनों को शामिल करते हुए एक सुविचारित और समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय ने राष्ट्र निर्माण में पारसी समुदाय के बहुमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला और देश की बहुलवादी सांस्कृतिक भावना को संरक्षित करने के महत्व को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से आयोग पारसी समुदाय से संबंधित मुद्दों, जिनमें जनसांख्यिकीय चुनौतियां, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच शामिल हैं, पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है. ये प्रयास समुदाय की अनूठी पहचान के प्रति संवेदनशीलता और स्पष्ट समझ से प्रेरित हैं.

एमएस/