
jaipur, 19 जुलाई . भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन और Saturday को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटाए जाने पर प्रतिक्रिया दी.
jaipur में मीडिया से बातचीत में भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन कुछ कॉकरोचों ने इसका दुरुपयोग कर देश का वातावरण दूषित करने की कोशिश की.
बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि सबके अपने-अपने अधिकार हैं. हम आजाद देश में रहते हैं और किसी को भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन आपने देखा कि इस प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ. कुछ कॉकरोज अचानक आए और देश के मूल्यों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की. ऐसी घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं.
उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रदर्शन करने पर किसी को कोई एतराज नहीं है, लेकिन जिस तरह की गतिविधियां हुईं, देश विरोधी नारे लगाना और राम जी के बारे में आपत्तिजनक कमेंट करना, वह बिल्कुल मंजूर नहीं है. जंतर-मंतर पर राम-जानकी जी का अपमान किया गया, जो आस्था के केंद्र हैं. भगवान राम को लेकर कोई आपत्तिजनक बात करेगा तो नाराजगी व्यक्त करना स्वाभाविक है. आस्था के केंद्रों के बारे में इस तरह नहीं बोलना चाहिए.
दूसरी ओर, सांसद नीरज मौर्य ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जिस तरह से उनके साथ व्यवहार किया गया, ये मुझे लगता है कि ठीक नहीं है और Government को, Government के मंत्री को मिलकर उनसे बात करनी चाहिए, क्योंकि वो एक शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे, भूख हड़ताल पर थे. जब पूर्व में Government के यही लोग विपक्ष में थे, तो इन्हीं सब बातों का वो समर्थन करते थे. मुझे लगता है कि Government जनता से बनी हुई है, Government जनता के लिए है. अगर Government सोनम वांगचुक के पास जाकर बात कर लेगी, तो उसमें कुछ उनका चला नहीं जाएगा. बातचीत से मसले हल होते हैं, बातचीत से समस्या का समाधान होता है. देश और समाज को सोनम वांगचुक की जरूरत है.
सपा सांसद नीरज मौर्य ने 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद मानसून सत्र पर कहा कि हाउस में हम लोग जनता की जो आवाज है, जनता की जो समस्याएं हैं, उसको सकारात्मक रूप से रखने का काम करेंगे. अब Government उस पर जवाब न देना चाहे, Government हाउस न चलाना चाहे, तो ये Government की मर्जी है. हम तो जनता की बात करेंगे और जनता की बात रखने का वहां अवसर मिलना चाहिए. इसलिए हम लोगों को जनता ने यहां भेजा है.
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डीकेएम/
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