
वाशिंगटन, 4 जुलाई . चीन अपने रणनीतिक हित साधने के लिए Pakistan का इस्तेमाल एक माध्यम के रूप में कर रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमानों, प्रशिक्षण विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों से जुड़ा 4 अरब डॉलर से अधिक का रक्षा सौदा इसी रणनीति का उदाहरण है.
अमेरिका स्थित थिंक टैंक ‘मिडिल ईस्ट फोरम’ की एक रिपोर्ट में चीन को लेकर ये खुलासा किया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सौदे से लीबिया पर संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध कमजोर पड़ सकते हैं, देश के आंतरिक संघर्ष का सैन्य संतुलन बदल सकता है और क्षेत्रीय भू-Political तनाव बढ़ सकता है.
थिंक टैंक के अनुसार, हाल के वर्षों में Pakistan और चीन के बीच रक्षा, सुरक्षा और खुफिया सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच Pakistan के 80 प्रतिशत से अधिक हथियार चीन से आयात हुए थे, जिससे Pakistan की बढ़ती निर्भरता और उसके रक्षा क्षेत्र में चीन की मजबूत होती मौजूदगी का संकेत मिलता है.
रिपोर्ट के अनुसार, “Pakistan अब भी अमेरिकी मूल के एफ-16 फाइटिंग फैल्कन विमानों का उपयोग करता है और समय-समय पर अमेरिका से सैन्य सहायता भी प्राप्त करता है, लेकिन उसकी सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा अब चीनी मूल के हथियारों पर आधारित है. Pakistan, चीन के साथ संयुक्त रूप से निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमान के साथ-साथ चीनी ड्रोन, एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली और अन्य रक्षा उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है.”
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया जैसे देशों के साथ Pakistan की रक्षा वार्ताओं और संभावित सौदों की संख्या बढ़ी है. चीनी मीडिया में भी यह दावा किया गया है कि Pakistan इनमें से कई देशों के साथ जेएफ-17 विमानों के सौदों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है.
सऊदी अरब के साथ संभावित समझौते के तहत Pakistan जेएफ-17 विमान उपलब्ध कराने के बदले वित्तीय व्यवस्था कर सकता है, हालांकि ऐसा कोई सौदा अब तक नहीं हुआ है. इसके पीछे चीनी हथियारों की गुणवत्ता, अमेरिकी प्रणालियों के साथ उनका तालमेल और वित्तीय पहलुओं को कारण बताया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है, “इसके बावजूद चीन Pakistan का इस्तेमाल इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए एक गेटवे के तौर पर कर रहा है. वहीं, Pakistan द्वारा इन रक्षा प्रणालियों को बढ़ावा दिए जाने से चीन की व्यापक रक्षा-औद्योगिक मौजूदगी और उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी बल मिल रहा है.”
थिंक टैंक का निष्कर्ष है कि चीन Pakistan के माध्यम से पश्चिम एशिया के रक्षा बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और Pakistan द्वारा चीनी हथियारों का प्रचार-प्रसार, बीजिंग की व्यापक रक्षा-औद्योगिक और रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में मदद करता है.
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केआर/
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