‎रिलायंस डेनमार्क की स्टाइसडल से ‎मिलकर बनाएगी हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर्स

मुंबई (Mumbai) . रिलायंस इंडस्ट्रीज ‎लिमिटेड (आरआईएल) ने ऐलान किया कि उसकी सोलर यूनिट रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर लिमिटेड (आरएनईएसएल) ने डेनमार्क की स्टाइसडल ए/एस के साथ ‎हिस्सेदारी की है. दोनों कंपनियां मिलकर हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर्स बनाएंगी. रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर लिमिटेड ने बताया ‎कि स्टाइसडल ए/एस डेनमार्क की कंपनी है. यह क्लाइमेट चेंज मिटिगेशन से जुड़ी कमर्शियलाइज टेक्नोलॉजी बनाती है. स्टाइसडल ए/एस की स्थापना हेनरिक स्टाइसडल द्वारा की गई है. पवन ऊर्जा के क्षेत्र में यह दुनिया की अग्रणी कंपनी है. साथ ही वैश्विक नवीकरणीय उद्योग में यह अलग सोच रखने वाली कंपनी है. स्टाइसडल जलवायु संकट का मुकाबला करने के लिए कई तकनीकों के विकास और व्यावसायीकरण में लगी हुई है. हाइड्रोजेन इलेक्ट्रोलाइजर्स के लिए इस नई तकनीक में ऊर्जा उत्पादन की लागत में महत्वपूर्ण कमी लाने की क्षमता है. वर्तमान में उपलब्ध तकनीकों के मुकाबले इस तकनीक से सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का रास्ता खुलता है. साथ ही भारत के हरित ऊर्जा के क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा.

आरआईएल की सहयोगी कंपनी रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर लिमिटेड (आरएनईएसएल) ने भी ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी डील की थी. रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर लिमिटेड ने ‎पिछले ‎दिनों कहा था कि उसने 5792 करोड़ रुपए (771 मिलियन डॉलर (Dollar)) में आरईसी सोलर होल्डिंग्स का अधिग्रहण किया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर लिमिटेड ने चाइना नेशनल ब्लूस्टार (ग्रुप) कंपनी लिमिटेड से आरईसी सोलर होल्डिंग्स एएस की 100 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की घोषणा की थी. वैश्विक स्तर पर फोटोवोल्टिक मैन्युफैक्चरिंग प्लेयर बनने के लिए रिलायंस के न्यू एनर्जी विजन में यह अधिग्रहण काफी महत्वपूर्ण है. यह अधिग्रहण रिलायंस ग्रुप के लिए साल 2030 तक सोलर एनर्जी के 100 गीगावाट उत्पादन के लक्ष्य को पाने में मददगार साबित होगा. इसी साल तक भारत का भी लक्ष्य नवीन ऊर्जा के 450 गीगावाट उत्पादन का है.

Check Also

नवरंग सैनी को आईबीबीआई अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार

नई ‎दिल्ली ( ा). नवरंग सैनी को भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के …