सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के सभ्यतागत पुनर्जागरण का प्रतीक है : हिमंता बिस्वा सरमा

गुवाहाटी, 8 मई . हिमंता बिस्वा सरमा ने Friday को कहा कि ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष India की अटूट आस्था, सभ्यता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं.

सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में सोमनाथ मंदिर के आध्यात्मिक महत्व की प्रशंसा करते हुए एक संस्कृत श्लोक साझा किया और कहा कि मंदिर का पुनर्निर्माण India की स्थायी सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है.

Chief Minister ने लिखा, “सोमनाथ पुनर्स्थापना के 75 वर्ष India की अडिग आस्था, सभ्यता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं.”

उन्होंने संस्कृत श्लोक — “सोमलिंगं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते, लभते फलम् मनोवाञ्छितम् मृतः स्वर्गं समाश्रयेत” — का उल्लेख करते हुए मंदिर के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया. सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है.

सरमा ने India के पहले उपPrime Minister और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की भूमिका को भी याद किया, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.

उनके अनुसार, सरदार पटेल के संकल्प और दूरदृष्टि के कारण सोमनाथ मंदिर का पुनर्जीवन संभव हुआ, जो सदियों तक हुए आक्रमणों और विनाश के बाद राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक निरंतरता का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा.

असम के Chief Minister ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘विकास भी, विरासत भी’ का मंत्र साकार हो रहा है, जिसके तहत India की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक विकास को भी आगे बढ़ाया जा रहा है.

Gujarat के पश्चिमी तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर India के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है. वर्तमान मंदिर संरचना का उद्घाटन 1951 में स्वतंत्रता के बाद शुरू किए गए व्यापक पुनर्निर्माण अभियान के तहत किया गया था.

मंदिर ट्रस्ट की अध्यक्षता वर्तमान में Prime Minister Narendra Modi कर रहे हैं. हाल के वर्षों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई बुनियादी ढांचा और पर्यटन परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं.

मंदिर के पुनर्स्थापन के 75वें वर्ष को स्मारक कार्यक्रमों और India की सांस्कृतिक विरासत व आध्यात्मिक परंपराओं पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के साथ मनाया जा रहा है.

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