चेन्नई, 2 अप्रैल . भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक शीर्ष अर्थशास्त्री ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में ही रेपो रेट में कटौती कर सकता है.

एक शोध रिपोर्ट में ग्रुप की मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्या कांति घोष ने भी कहा था कि आरबीआई फिलहाल अपना रुख नहीं बदलेगा.

इस वित्त वर्ष के लिए मॉनिट्री पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की पहली बैठक इसी सप्ताह होगी.

रेपो रेट वह रेट है जिस पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है. यह दर फिलहाल 6.5 प्रतिशत है.

घोष के अनुसार, इंफ्लेशन खाद्य मूल्य से है.

आगे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति का प्रभाव फूड इंफ्लेशन पर रहेगा. वित्त वर्ष 2024 के शेष माह में मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत से थोड़ा ऊपर रहने की संभावना है.

उन्होंने यह भी कहा कि इस साल जुलाई तक मुद्रास्फीती में गिरावट आने की उम्मीद है, लेकिन उसके बाद सितंबर में यह फिर से बढ़ कर 5.4 प्रतिशत पर आ जाएगा, जिसके बाद इसमें फिर गिरावट आएगी. पूरे वित्त वर्ष 2025 के लिए यह औसत 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना है.

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