
New Delhi, 9 अगस्त . सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने Sunday को कहा कि केंद्र Government ने ‘अनुसूचित जातियों के लिए विकास कार्य योजना’ (डीएपीएससी) के तहत अनुसूचित जातियों के कल्याण और विकास के लिए तय फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और समीक्षा के तरीकों को मजबूत किया है.
उन्होंने हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, डीएपीएससी फंड के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर समीक्षा करके इसके लिए जिम्मेदार 38 मंत्रालयों/विभागों द्वारा फंड के इस्तेमाल की निगरानी करता है.
उन्होंने कहा कि समीक्षा बैठकें सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री और सचिव की अध्यक्षता में होती हैं. आठवले ने बताया कि हाल ही में डीएपीएससी के तहत समीक्षा बैठकें 29 अप्रैल 2025 को राज्य मंत्री बीएल वर्मा की अध्यक्षता में और 25 अगस्त 2025 तथा 16 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता सचिव सुधांश पंत के स्तर पर आयोजित की गईं.
समय-समय पर संचार के माध्यम से डीएपीएससी के लिए जिम्मेदार मंत्रालयों/विभागों से खर्च में तेजी लाने और डीएपीएससी के तहत तय फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए कहा जाता है.
आठवले ने कहा कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री द्वारा जारी निर्देशों का पालन करते हुए डीएपीएससी को लागू करने वाले सभी 38 मंत्रालयों/विभागों ने अपने-अपने मंत्रालयों/विभागों में डीएपीएससी फंड की वित्तीय और भौतिक निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है.
उन्होंने कहा कि केंद्र Government अनुसूचित जातियों के कल्याण और विकास के लिए डीएपीएससी के तहत तय फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और समीक्षा के तरीकों को मजबूत करना जारी रखे हुए है.
आठवले ने कहा कि 2020-21 से मंत्रालयों/विभागों में डीएपीएससी के तहत बजट अनुमान (बीई), संशोधित अनुमान (आरई) और वास्तविक खर्च के आंकड़ों से पता चलता है कि 2020-21 से 2025-26 तक हर साल वास्तविक खर्च संशोधित अनुमान से कम रहा.
राज्य मंत्री ने आगे बताया कि संशोधित अनुमानों का इस्तेमाल 2020-21 में 81.61 प्रतिशत, 2021-22 में 91.22 प्रतिशत, 2022-23 में 91.90 प्रतिशत, 2023-24 में 93.83 प्रतिशत, 2024-25 में 92.57 प्रतिशत और 2025-26 में 85.65 प्रतिशत रहा.
उन्होंने कहा कि ये फंड सिर्फ अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए तय किए गए हैं. कुछ मंत्रालयों/विभागों में योजनाओं की सामान्य प्रकृति के कारण, कुछ मामलों में फंड का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता है.
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एएसएच/डीकेपी
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