
New Delhi, 14 जुलाई . राम मंदिर ट्रस्ट और मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद के बीच संत समाज और हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं ने तल्ख टिप्पणी की. अयोध्या में हिंदू याचिकाकर्ता धर्म दास और संत देवेशाचार्य ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की. वहीं, हरिद्वार में बड़ा उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने राम मंदिर को लेकर विपक्षी दलों की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय बताया.
अयोध्या में हिंदू याचिकाकर्ता धर्म दास ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने जो बातें कही हैं, वे सही हैं. इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही हुई है और इसके लिए कुछ पदाधिकारी जिम्मेदार हैं. चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने चाहिए. भगवान राम के नाम पर लोगों की आस्था के साथ विश्वासघात हुआ है. गोपाल राव और अनिल मिश्रा समेत कुछ लोग पहले से ही इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल रहे हैं. चंपत राय चुपचाप बैठे रहे और चंदे की चोरी हुई.
उन्होंने कहा कि इन लोगों ने भगवान राम के साथ गद्दारी की है. ऐसे लोगों को भगवान राम, न्यायालय और समाज, तीनों से दंड मिलेगा. समाज में इनके प्रति भारी नाराजगी है. वकील नाराज हैं, भक्त नाराज हैं, जहां कहीं भी ये लोग दिखाई देंगे, लोग इनके प्रति घृणा व्यक्त करेंगे.
संत देवेशाचार्य ने भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा इतना बड़ा विवाद सामने आया. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पर मंदिर के कोष और चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी होती है. यदि स्वयं कोषाध्यक्ष यह कह रहे हैं कि उनके पास केवल नाममात्र का पद है और हस्ताक्षर का अधिकार भी नहीं है, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. एक संत के लिए किसी पद से मोह रखना उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कोई संत केवल पद पर बने रहने के लिए संतत्व के मूल्यों से समझौता करता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है.
उधर, हरिद्वार में बड़ा उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने राम मंदिर को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से की जा रही टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जो लोग आज राम मंदिर और चढ़ावे को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वे स्वयं कभी राम मंदिर में दर्शन करने तक नहीं गए. यही लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे और उन्हें काल्पनिक बताते रहे. अब वही लोग राम मंदिर पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं.
रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है और इसे Political विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए. मंदिर निर्माण का श्रेय भाजपा को मिलने से रोकने के लिए कुछ लोग राम मंदिर का विरोध कर रहे हैं. राम मंदिर और राजनीति का कोई संबंध नहीं है, लेकिन कुछ लोग Political कारणों से इसे विवादों में घसीटने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर आंदोलन में कभी भाग नहीं लिया और मंदिर बनने के बाद भी दर्शन करने नहीं पहुंचे, वे आज राम मंदिर और उससे जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं, जो उचित नहीं है.
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