
कोलकाता, 3 जुलाई . कोलकाता स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने Friday को तृणमूल कांग्रेस के पार्षद शाकिर अली को अंतरिम जमानत दे दी. शाकिर अली पूर्व तृणमूल सांसद अपरूपा पोद्दार के पति हैं. उन्हें 2023 के रामनवमी हिंसा मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में 30 जून को गिरफ्तार किया गया था.
30 जून को ही एनआईए की विशेष अदालत ने शाकिर अली को दो दिन की एनआईए हिरासत में भेजा था. इसी दौरान उनके वकील ने अदालत में जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर Friday को बंद कमरे में सुनवाई हुई.
शाकिर अली के वकील ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी. हालांकि, शुरुआत में याचिका खारिज कर दी गई थी, लेकिन बाद में अदालत ने सशर्त अंतरिम जमानत दे दी.
अली के वकील ने मीडिया को बताया कि उनके मुवक्किल को कैंसर होने की आशंका है और उनका इलाज चल रहा है.
वकील ने कहा, “उन्हें नियमित रूप से कई चिकित्सकीय जांच करानी पड़ती हैं. उनके शरीर में ऑक्सीजन संचार से जुड़ी समस्या भी है. वह जांच में एनआईए का पूरा सहयोग कर रहे हैं. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए विशेष एनआईए अदालत ने अंतरिम और सशर्त जमानत प्रदान की है.”
हालांकि, अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं. जांच के हित में शाकिर अली को हर 15 दिन में एनआईए कार्यालय में उपस्थित होना होगा. इसके अलावा अदालत की अनुमति के बिना वह राज्य से बाहर नहीं जा सकेंगे.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में हुगली जिले के रिषड़ा इलाके में रामनवमी शोभायात्रा के दौरान हिंसा भड़क गई थी. उस समय बमबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई थी.
हिंसा के कारण आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया था. हालात इतने बिगड़ गए थे कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को कुछ दिनों तक इलाके में लगभग कर्फ्यू जैसी स्थिति लागू करनी पड़ी थी.
घटना के समय भाजपा के तत्कालीन नेता दिलीप घोष एक कार्यक्रम में शामिल होकर वहां से निकले थे. आरोप है कि उनके जाने के कुछ समय बाद ही हिंसा भड़क गई थी.
एनआईए ने इसी मामले की जांच के दौरान इस सप्ताह की शुरुआत में शाकिर अली को गिरफ्तार किया था.
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एएमटी/एबीएम
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