
New Delhi, 30 जून . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि India को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में क्षेत्रीय उद्योगों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से सशक्त राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है. इसके लिए जरूरी है कि क्षेत्रीय क्षमताओं को राष्ट्रीय ताकत में बदला जाए और स्थानीय नवाचारों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक पहुंचाया जाए.
रक्षा मंत्री Tuesday को वडोदरा में आयोजित ‘वाइब्रेंट Gujarat रीजनल कॉन्फ्रेंस’ में उद्योगपतियों, उद्यमियों, युवा इनोवेटर्स और शिक्षाविदों को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में Gujarat के Chief Minister भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और Gujarat Government की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा भी मौजूद रहीं.
राजनाथ सिंह ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक Political और आर्थिक परिदृश्य में India की भूमिका उसकी आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और सामूहिक संकल्प से तय होगी. उन्होंने कहा कि महान राष्ट्र तीन प्रमुख स्तंभों, आर्थिक मजबूती, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा, पर खड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास देश की सुरक्षा को मजबूती देते हैं, जबकि सुरक्षित वातावरण उद्योग और नवाचार के विकास के लिए जरूरी होता है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र का विकास केवल हथियारों और सैन्य तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़े औद्योगिक इकोसिस्टम को गति देता है. डिफेंस कॉरिडोर, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, रोजगार और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के माध्यम से देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है. India कभी अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, अब रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. स्वदेशी प्लेटफॉर्म, निजी क्षेत्र की भागीदारी और स्टार्टअप्स के योगदान ने देश में मजबूत रक्षा इकोसिस्टम तैयार किया है.
राजनाथ सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भर India अभियान के तहत एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, रक्षा खरीद प्रक्रिया में सुधार, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड, आईडेक्स, सृजन पोर्टल और अन्य पहलों के जरिए छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि देश का रक्षा उत्पादन वर्ष 2014 में करीब 46 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर अब रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. वहीं रक्षा निर्यात भी 1,000 करोड़ रुपए से कम के स्तर से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपए के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है.
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं है. इसका मतलब है कि India अपनी क्षमताओं के आधार पर मजबूत बने और वैश्विक साझेदारों के साथ बराबरी के स्तर पर सहयोग करे. उन्होंने कहा कि Government विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त उपक्रम और सहयोग को बढ़ावा दे रही है.
Gujarat की औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि राज्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास का बड़ा केंद्र बन सकता है. उन्होंने वडोदरा में टाटा-एयरबस के सी-295 परिवहन विमान निर्माण केंद्र और Gujarat में तैयार किए जा रहे के-9 वज्र स्वचालित तोप प्रणाली का उल्लेख किया.
उन्होंने कहा कि साणंद और धोलेरा में विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम India की तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव बनेगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में Gujarat की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
राजनाथ सिंह ने कहा कि Gujarat का मजबूत रसायन, पेट्रोकेमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बंदरगाह और जहाज निर्माण क्षेत्र रक्षा उद्योग को नई दिशा दे सकता है. उन्होंने कहा कि राज्य में रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की पूरी क्षमता मौजूद है और Gujarat के युवा व उद्यमी इसमें अहम योगदान दे सकते हैं.
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने डिफेंस और एयरोस्पेस उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों से संवाद किया. उन्होंने निजी उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के प्रयासों की सराहना की और रक्षा विनिर्माण को मजबूत बनाने के लिए Government की प्रतिबद्धता दोहराई.
‘वाइब्रेंट Gujarat ग्लोबल समिट’ की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी. आज यह व्यापार, निवेश, ज्ञान साझेदारी और सतत विकास के लिए दुनिया के प्रमुख मंचों में शामिल हो चुका है. इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए Gujarat Government क्षेत्रीय सम्मेलनों का आयोजन कर रही है, जिनका उद्देश्य स्थानीय क्षमताओं को ‘विकसित India 2047’ और ‘विकसित Gujarat 2047’ के लक्ष्य से जोड़ना है.
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एससीएच/
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