
jaipur, 3 जुलाई . Rajasthan के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित एचपीसीएल Rajasthan रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) अब आखिरकार शुरू होने के लिए तैयार है. करीब 15 साल के इस सफर में परियोजना को Political विवाद, जमीन अधिग्रहण को लेकर विरोध, बार-बार हुई देरी, बढ़ती लागत और यहां तक कि आग लगने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. आग की घटना के कारण अंतिम समय में इसका उद्घाटन भी टालना पड़ा था.
Prime Minister Narendra Modi Saturday को देश की पहली ग्रीनफील्ड बीएस-6 मानकों के अनुरूप एकीकृत रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करेंगे.
इस परियोजना का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. परियोजना पूरी होने से पहले इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसका दो बार शिलान्यास हुआ, उद्घाटन की तारीखें कई बार घोषित की गईं, लेकिन हर बार टल गईं. इसके अलावा स्थान को लेकर Political विवाद, जमीन अधिग्रहण को लेकर विरोध, लागत में भारी बढ़ोतरी और काम में लंबी देरी भी हुई.
Prime Minister Narendra Modi को पहले 21 अप्रैल 2026 को इस रिफाइनरी का उद्घाटन करना था, लेकिन, 20 अप्रैल को सीडीयू-वीडीयू यूनिट में रिसाव के बाद आग लग गई, जिसके कारण उद्घाटन कार्यक्रम टालना पड़ा. इससे परियोजना की शुरुआत में एक बार फिर देरी हो गई.
एचआरआरएल की रिफाइनिंग क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) है. इसके साथ ही इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (एनसीआई) भारतीय रिफाइनरियों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है. उम्मीद है कि इस परियोजना से Rajasthan सिर्फ कच्चा तेल उत्पादन करने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़ा पेट्रोकेमिकल विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र बनकर उभरेगा.
शुरुआत में इस रिफाइनरी को मौजूदा बालोतरा जिले के बायतू क्षेत्र के लिलाला गांव में लगाने का प्रस्ताव था. यह घोषणा होते ही कई प्रभावशाली कारोबारी, राजनेता और जमीन के निवेशक वहां पहुंच गए. उन्होंने जमीन की कीमतें बढ़ने की उम्मीद में हजारों बीघा जमीन खरीद ली.
जब Government ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की तो कई किसानों ने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया. खबरों के मुताबिक कुछ किसान तो प्रति बीघा 1 करोड़ रुपए तक की मांग कर रहे थे.
बढ़ते विरोध को देखते हुए अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस Government ने रिफाइनरी को पचपदरा स्थानांतरित कर दिया, जहां पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध थी. इस फैसले के कारण जबरदस्त Political विरोध हुआ.
इसके बाद बायतू के विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी अपनी ही Government के खिलाफ खुलकर उतर आए. उन्होंने आरोप लगाया कि रिफाइनरी को जोधपुर क्षेत्र को फायदा पहुंचाने के लिए काकानी में डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के साथ वहां स्थानांतरित किया जा रहा है.
उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी, “मैं अपनी जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहां से जाने नहीं दूंगा.”
यह विवाद तब और गहरा गया, जब तत्कालीन राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने इस्तीफा दे दिया, जिससे यह रिफाइनरी Rajasthan की सबसे ज्यादा Political बहस वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक बन गई.
यह परियोजना शुरू से ही Political विवादों में घिरी रही है. Rajasthan के पूर्व Chief Minister अशोक गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया कि पिछली भाजपा Government के दौरान रिफाइनरी का काम पांच साल तक रुका रहा, जिससे इसकी लागत काफी बढ़ गई. उन्होंने इस रिफाइनरी को Rajasthan के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना बताया और कहा कि इसका भव्य सार्वजनिक उद्घाटन होना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मैंने आज अखबारों में पढ़ा कि Prime Minister किसी बड़ी जनसभा को संबोधित करने के बजाय रिफाइनरी परिसर के अंदर ही कार्यक्रम करेंगे. यह परियोजना Rajasthan के लिए बड़ी उपलब्धि है, इसलिए इसका सार्वजनिक रूप से भव्य उद्घाटन होना चाहिए.”
परियोजना की शुरुआत को याद करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि बाड़मेर में तेल मिलने के बाद तत्कालीन कांग्रेस Government के लगातार प्रयासों से ही इस रिफाइनरी परियोजना की शुरुआत हो सकी.
इस परियोजना का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि पूर्व Prime Minister मनमोहन सिंह और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के सहयोग से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और Rajasthan Government के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद रिफाइनरी कंपनी का गठन किया गया.
गहलोत की बातों का जवाब देते हुए भाजपा के राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गहलोत ने कहा कि Chief Minister के तौर पर अशोक गहलोत के कार्यकाल में न तो रिफाइनरी की जगह ठीक से तय की गई और न ही इसे लागू करने का कोई ठोस प्लान या वित्तीय ढांचा तैयार किया गया.
उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ Political फायदे के लिए जल्दबाज़ी में आधारशिला रखी गई. राजेंद्र गहलोत ने आगे दावा किया कि 2016 में तत्कालीन बीजेपी Government के समय ही प्रोजेक्ट साइट को अंतिम रूप दिया गया था और एक व्यवस्थित वित्तीय योजना तैयार की गई थी.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस Government के कार्यकाल में इस परियोजना पर बहुत कम काम हुआ. उन्होंने कहा, “कांग्रेस Government रिफाइनरी का काम तेजी से आगे बढ़ाने के बजाय Political मामलों में ही उलझी रही.”
एचआरआरएल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और Rajasthan Government का संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) है. इसमें एचपीसीएल की 74 प्रतिशत और Rajasthan Government की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है. हालांकि इस परियोजना की लागत शुरुआती अनुमान से काफी बढ़ गई, लेकिन अब इसे देश की सबसे आधुनिक और तकनीक से लैस रिफाइनरियों में से एक माना जाता है.
इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (एनसीआई) काफी ऊंचा है, जिससे यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले भारी और कम गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को भी आसानी से पेट्रोल, डीजल, पॉलीप्रोपाइलीन और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों में बदल सकता है.
हालांकि रिएक्टर, कॉलम और स्टोरेज टैंक जैसे अधिकांश भारी उपकरण ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत India में ही बनाए गए हैं. वहीं, अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम और हाईप्रेशर कंप्रेसर जैसे कुछ उन्नत उपकरण अमेरिका, जापान और यूरोप से मंगाए गए हैं.
वैश्विक गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने जरूरी वेल्डिंग और फिनिशिंग के काम की निगरानी की. Rajasthan के कच्चे तेल में मोम (वैक्स) की मात्रा अधिक होने के कारण इंजीनियरों ने Gujarat के मुंद्रा से पचपदरा तक एक विशेष हीटेड क्रूड ऑयल पाइपलाइन बनाई. इस पाइपलाइन में थर्मल इंसुलेशन और हीटिंग स्टेशन लगाए गए हैं, ताकि परिवहन के दौरान कच्चा तेल जमने न पाए.
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एसएचके/
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