राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, एक साल के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाई रोक

जोधपुर, 26 मई . नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी व्यक्ति को Rajasthan हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी. कोर्ट ने आरोपी पर इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे सभी social media प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर एक साल का बैन लगाया है.

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल-न्यायाधीश वाली जोधपुर बेंच ने यह आदेश बीकानेर के मुक्ता प्रसाद नगर Police स्टेशन में दर्ज एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए पारित किया.

यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 78(2) और 79, तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो ) अधिनियम की धारा 11 और 12 के तहत दर्ज किया गया था.

Rajasthan हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी को एक वर्ष की अवधि के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे सभी social media प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से प्रतिबंधित किया जाता है.

कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि आरोपी को इस एक वर्ष की अवधि के दौरान किसी भी social media प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए पाया गया. चाहे वह अपने नाम से हो, या किसी काल्पनिक नाम से, अपने मोबाइल/ई-मेल आईडी का उपयोग करके या किसी काल्पनिक ई-मेल आईडी का उपयोग करके तो जमानत का आदेश रद्द कर दिया जाएगा.

इस आदेश में आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार के सदस्यों से किसी भी माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने से भी प्रतिबंधित किया गया है.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, First Information Report 22 फरवरी को नाबालिग पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने 1 फरवरी से 20 फरवरी के बीच यौन उत्पीड़न, पीछा करने और साइबर-संबंधित अपराध किए थे.

याचिकाकर्ता को 24 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और तब से बीएनएस तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है.

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने यह दलील दी कि मौखिक आरोपों के अलावा शिकायतकर्ता द्वारा First Information Report में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई भी ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई है.

यह तर्क भी दिया गया कि जांच पूरी हो चुकी है, आरोपी को अब हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है और उसके फरार होने की कोई संभावना नहीं है.

इसके अतिरिक्त यह भी प्रस्तुत किया गया कि आरोपी काफी समय से हिरासत में है और इस मामले में मुकदमा चलने में अभी समय लग सकता है.

याचिका का विरोध करते हुए शिकायतकर्ता के वकील और लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि आरोपीपीड़िता को परेशान कर रहा था, जिससे उसके लिए सामान्य माहौल में रहना मुश्किल हो गया था और उसकी जान को मनोवैज्ञानिक रूप से खतरा पैदा हो गया था.

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद Rajasthan हाईकोर्ट ने कहा कि कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, याचिकाकर्ता पर कुछ शर्तें लगाना उचित है, ताकि पीड़ित की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके.

आदेश में यह भी कहा गया कि आरोपी काफी समय से हिरासत में है और मुकदमे को पूरा होने में अभी और समय लगने की संभावना है. जमानत देते हुए जस्टिस जैन ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार 50,000 रुपए का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करे.

social media पर पाबंदी के अलावा, आदेश में यह शर्त भी लगाई गई कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा.

Rajasthan हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सुनवाई के लिए तय तारीखों पर आरोपी ट्रायल कोर्ट के सामने उपस्थित रहे और यह स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर उसकी जमानत रद्द की जा सकती है.

डीकेएम/