राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार पर कसा शिकंजा, 103 अधिकारी निलंबित, छह बर्खास्त

jaipur, 29 मई . Rajasthan Government की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत Chief Minister भजनलाल शर्मा ने 103 अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है, जिनमें एक आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं. इसके अलावा, छह अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन उनके भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप साबित होने के बाद स्थायी रूप से रोक दी गई है.

Rajasthan के Chief Minister भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई शुरू की है. इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि Government किसी भी स्तर पर भ्रष्ट आचरण को बर्दाश्त नहीं करेगी.

राज्य Government ने रिश्वतखोरी, ट्रैप ऑपरेशन, सरकारी पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े 108 मामलों में मुकदमा चलाने की मंजूरी भी दे दी है. इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य मामलों में भी कार्रवाई शुरू की गई है.

भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों, जिनमें रिश्वतखोरी और अधिकारों के दुरुपयोग के मामले शामिल हैं, में अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए अधिकारियों को तुरंत सेवा से हटा दिया गया है.

बर्खास्त किए गए लोगों में भरत प्रकाश मेघवाल (तत्कालीन विकास अधिकारी, पीडब्ल्यूडी, सुवाणा-भीलवाड़ा), राजेश कुमार नैनावत (तत्कालीन उपनिदेशक, कृषि विभाग, झुंझुनू), महावीर सिंह आसीवाल (तत्कालीन सहायक आयुक्त, वित्त एवं कराधान विभाग, भरतपुर), डॉ. राम मोहन सिंह चौहान (सीएचसी बिछीवाड़ा, डूंगरपुर), डॉ. मुरलीधर शर्मा (सीएचसी रामगढ़ पचवारा, दौसा) और डॉ. मनोहर लाल (सीएचसी रामगढ़, अलवर) शामिल हैं.

Chief Minister भजनलाल शर्मा ने दोहराया कि Rajasthan की जनता के लिए पारदर्शी, संवेदनशील और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन सुनिश्चित करना Government की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी सार्वजनिक धन के गबन या अपने पद के दुरुपयोग का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी और सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित करना भी शामिल है.

Government ने भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की 100 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोक दी है. इनमें बनवारी लाल मीणा (आरएएस), देवेंद्र सिंह ढिल्लो (आरएएस), महेंद्र सिंह (आरपीएस) के साथ-साथ चिकित्सा, सार्वजनिक निर्माण और प्रशासनिक विभागों के कई पूर्व अधिकारी शामिल हैं.

एक अन्य महत्वपूर्ण कार्रवाई में Chief Minister ने अलवर स्थित पीएचईडी प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती को सेवामुक्त करने का आदेश दिया. यह कार्रवाई पेयजल की गुणवत्ता जांच में फर्जी रिपोर्ट देने के आरोपों के बाद की गई. इसी तरह, एसजेएम-4 कोटा के पूर्व एपीपी हरि सिंह मीणा को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद सेवामुक्त कर दिया गया.

अन्य प्रमुख कार्रवाइयों में डॉ. विलास राव गुलहाने (तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, झालावाड़) की अनिवार्य सेवानिवृत्ति शामिल है. इसके साथ ही कई अधिकारियों की पेंशन स्थायी रूप से रोकने की कार्रवाई भी की गई है. इनमें देशराज नूनिया (तत्कालीन अधिशासी अभियंता, आईजीएनपी मोहनगढ़, जैसलमेर), देवी सिंह (तत्कालीन एसडीएम, डीग), डॉ. पवन कुमार जैन (तत्कालीन बीसीएमओ, लालसोट), मायालाल सैनी (तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी अलवर), राकेश चौहान (तत्कालीन एईएन, पीएचईडी अलवर), गोपाल लाल कुमावत (तत्कालीन लेखा अधिकारी, Rajasthan जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड, jaipur), राकेश सिंह (तत्कालीन एईएन, पीएचईडी नीमराणा), प्रदीप कुमार (तत्कालीन जेईएन, पीएचईडी नीमराणा), विशाल सक्सेना (तत्कालीन एक्सईएन, पीएचईडी शाहपुरा) और महेंद्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन एसीई, विशेष परियोजनाएं, अजमेर) शामिल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि Rajasthan Government ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त और समयबद्ध कार्रवाई के जरिए जनहित की रक्षा करते हुए प्रशासन में जवाबदेही, ईमानदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया है.

एसएचके/डीकेपी