सीजेपी विरोध प्रदर्शन में हुई झड़पों को लेकर राज ठाकरे ने केंद्र की आलोचना की

Mumbai , 21 जुलाई . Maharashtra नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने Tuesday को सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराने और विरोध कर रहे छात्रों पर हिंसक लाठीचार्ज को लेकर केंद्र Government पर तीखा हमला बोला.

ठाकरे ने social media प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर अपनी बात रखते हुए Government के सख्‍त रवैये की निंदा की और कहा कि यह Government खुद मानसिक रूप से बीमार हो गई है और इसे अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत है.”

मनसे प्रमुख ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केंद्र Government ने वांगचुक को जबरदस्ती उठाया और अस्पताल में भर्ती करा दिया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज यह दिखाता है कि Government जायज विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में गर्व महसूस करती है.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग को दोहराते हुए ठाकरे ने Government की हिचकिचाहट पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान कौन हैं कि उनका इस्तीफा स्वीकार करना Government को अपनी हार जैसा लगता है? देश के छात्रों का गुस्सा धर्मेंद्र प्रधान और Government के अहंकार से कहीं ज्‍यादा महत्वपूर्ण है.”

उन्होंने पूछा कि जो Prime Minister ‘परीक्षा पे चर्चा’ करते हैं, वे सड़कों पर छात्रों से सीधे बात क्यों नहीं कर रहे हैं. शिकायतों और विपक्ष के प्रति सत्ताधारी दल के रवैये की आलोचना करते हुए ठाकरे ने कहा कि प्रशासन में अहंकारी सोच पैदा हो गई है. सत्ताधारी पार्टी का मानना ​​है कि उसने चुनाव जनता के वोटों से नहीं, बल्कि केंद्रीय एजेंसियों और ईवीएम के जरिए जीते हैं.

ठाकरे ने ऐतिहासिक और वैश्विक छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए अरब स्प्रिंग (2011), श्रीलंका संकट (2022), नेपाल में Government-विरोधी प्रदर्शनों और India में जयप्रकाश नारायण की ‘संपूर्ण क्रांति’ का उदाहरण दिया और कहा कि छात्रों के असंतोष ने इतिहास में बड़े Political बदलाव किए हैं.

उन्होंने कहा, “यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है. यह महंगाई, कॉन्ट्रैक्ट कल्चर, दमघोंटू शहरी विकास और व्यापक स्तर पर शासन की विफलता के खिलाफ जनता की निराशा का विस्फोट है.”

उन्होंने कहा कि छात्रों ने जो हिम्मत दिखाई है, वह देश के हालात को लेकर गहरी निराशा से उपजी है. उन्होंने चेतावनी दी कि Government समझदारी के बजाय बर्बरता का सहारा लेती है, तो ऐतिहासिक आंदोलनों से मिली सत्ता हाथ से निकल जाएगी. नीट जैसी सेंट्रलाइज्‍ड एंट्रेंस परीक्षाओं के खिलाफ अपनी पार्टी का रुख दोहराते हुए, ठाकरे ने प्रशासन से जबरदस्ती के बजाय समझदारी दिखाने की अपील की.

उन्होंने कहा, “एक अयोग्य मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए और परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए. विरोध-प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने में कोई बहादुरी नहीं है. असली समझदारी बातचीत के जरिए उन्हें सुलझाने में है. मनसे इन छात्रों और उनकी मांगों का पूरा समर्थन करती है.”

एएसएच/एबीएम