
देहरादून, 17 जुलाई . उत्तराखंड के देहरादून में कांग्रेस सांसद और Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद किया. उन्होंने Government पर निशाना साधते हुए कहा कि India में पेपर लीक होना आम बात हो गई है और पूरा शिक्षा सिस्टम इसमें शामिल है, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.
देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था Government-केंद्रित है, जबकि अब India को छात्र-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि एक छात्र पांच साल तक रोजाना 10 घंटे तैयारी करता है और औसतन उसके परिवार का 9 लाख रुपए खर्च होता है. इसके बावजूद पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं. सीट और नौकरी का “रेट कार्ड” बन गया है, लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली. इससे 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है. इस भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था को जड़ से बदलने की जरूरत है. 21वीं सदी की ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनानी होगी, जो स्वतंत्र और जवाबदेह हो तथा छात्रों को पूरी सुरक्षा दे.
उन्होंने कहा कि छात्रों के सामने दो रास्ते हैं. पहला रास्ता ईमानदारी और मेहनत का है. इस रास्ते पर चलने के लिए पांच साल तक रोजाना आठ घंटे मेहनत करनी पड़ती है. इसके साथ आर्थिक बोझ, परिवार का दबाव और उम्र सीमा जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है. दूसरा रास्ता पेपर लीक का है. अगर किसी के पास पैसा है, वह भ्रष्ट है और ईमानदारी से नहीं, बल्कि चोरी करके आगे बढ़ना चाहता है, तो उसके लिए एक दूसरा छिपा हुआ रास्ता है, जो पेपर लीक का रास्ता है.
राहुल गांधी ने कहा कि इस रास्ते पर चलने के लिए पहला नियम यह है कि माता-पिता गरीब या मध्यम वर्ग के नहीं होने चाहिए. दूसरा, ईमानदारी से काम नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि 99.9 प्रतिशत छात्र ईमानदारी का रास्ता चुनते हैं, लेकिन कुछ लोग व्यवस्था का इस्तेमाल कर पेपर लीक के रास्ते का फायदा उठाते हैं, जिससे बाकी सभी युवाओं को नुकसान होता है.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. पिछले 10 वर्षों में 7 करोड़ से अधिक छात्र इससे प्रभावित हुए हैं. इस दौरान 152 पेपर लीक हुए, यानी औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि इस मामले में दोष सिद्ध होने की दर शून्य है. इस अपराध के लिए आज तक एक भी व्यक्ति जेल नहीं गया और न ही किसी को सजा मिली है.
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एएमटी/एबीएम
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