
New Delhi, 5 मई . Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अपनी ही पार्टी के नेताओं को कड़ी नसीहत दी है. उन्होंने कांग्रेस के उन नेताओं की आलोचना की, जो तृणमूल कांग्रेस की हार पर खुशी जता रहे थे. राहुल गांधी ने साफ कहा कि ‘छोटी राजनीति’ छोड़कर बड़े मुद्दे को समझने की जरूरत है.
social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा, “कांग्रेस के कुछ लोग और अन्य दल टीएमसी की हार पर जश्न मना रहे हैं. उन्हें यह समझना चाहिए कि असम और बंगाल के जनादेश की ‘चोरी’ भारतीय जनता पार्टी का लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में बड़ा कदम है.”
उन्होंने लिखा, “छोटी राजनीति को अलग रखें. यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे India का मामला है.”
यह बयान ऐसे समय आया है, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की 15 साल पुरानी Government पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होती दिख रही है और सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई में भाजपा दो-तिहाई बहुमत के साथ Government बनाने की ओर बढ़ रही है.
राहुल गांधी ने इससे पहले ममता बनर्जी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का समर्थन भी किया था. उन्होंने कहा, “असम और बंगाल में भाजपा ने चुनाव आयोग के सहयोग से वोट चुराए हैं. हम ममता बनर्जी से सहमत हैं. बंगाल में 100 से ज्यादा सीटें छीनी गई हैं. हमने यह तरीका पहले भी Madhya Pradesh, Haryana, Maharashtra और Lok Sabha 2024 में देखा है. “
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है. Monday को 293 सीटों के नतीजे घोषित हुए, जबकि दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा और उसकी गिनती 24 मई को की जाएगी.
घोषित नतीजों के मुताबिक, भाजपा ने 206 सीटें जीतकर बड़ी बढ़त हासिल की है, जबकि टीएमसी 81 सीटों पर सिमट गई. ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से ज्यादा वोटों से हार गईं. कांग्रेस को 2 सीटें, सीपीआई (एम) को 1 सीट, जबकि एआईएसएफ 1 और आम जनता उन्नयन पार्टी को 2 सीटें मिलीं.
खास बात यह रही कि टीएमसी 10 जिलों (जैसे कूच बिहार, पूर्वी मिदनापुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग) में एक भी सीट नहीं जीत सकी और आदिवासी व मतुआ बहुल क्षेत्रों में भी उसे हार का सामना करना पड़ा.
असम में भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की. भाजपा ने 82 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस केवल 19 सीटों तक सीमित रह गई, जिससे राज्य में विपक्ष और कमजोर हो गया है.
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