राहुल गांधी ने कोयला ढोने वाले मजदूरों की साइकिल खींची, रांची में बोले- केंद्र सरकार सार्वजनिक कंपनियों को खत्म कर रही – indias.news

रांची, 5 फरवरी . कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के साथ सोमवार को रांची पहुंचे. रामगढ़ से लेकर रांची तक लगभग 35 किलोमीटर की यात्रा के दौरान उन्होंने कई जगहों पर रोड शो किया और लोगों से मुलाकात की. कांग्रेस नेता रांची-रामगढ़ के बीच चुटुपालू घाटी में गाड़ी से उतरकर साइकिल पर कोयला ढोने वाले मजदूरों के बीच गए और साइकिल को थोड़ी दूर तक खींचा.

उन्होंने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर कर लिखा, “साइकिल पर 200-200 किलो कोयला लेकर रोज 30-40 किलोमीटर चलने वाले इन युवाओं की आय नाम मात्र है. बिना इनके साथ चले, इनके भार को महसूस किए, इनकी समस्याओं को नहीं समझा जा सकता. इन युवा श्रमिकों की जीवन गाड़ी धीमी पड़ी, तो भारत निर्माण का पहिया भी थम जाएगा.“

राहुल गांधी ओरमांझी के पास स्कूली बच्चों के एक समूह के साथ काफी देर तक उनकी पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद के बारे में बात करते रहे. रांची आकर वह हेमंत सोरेन के कांके रोड स्थित आवास पर गए और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन से मुलाकात कर उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया.

बाद में रांची के एचईसी इलाके में शहीद मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार धीरे-धीरे सार्वजनिक क्षेत्र को खत्म कर रही है. केंद्र सरकार रांची में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एचईसी का निजीकरण करना चाहती है. मैं जहां भी जाता हूं, वहां मुझे पीएसयू के लोग हाथों में पोस्टर लेकर खड़े दिखते हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि देश में आर्थिक अन्याय, महिलाओं के खिलाफ अन्याय और मजदूरों के खिलाफ अन्याय हो रहे हैं. ये अन्याय मोदी जी और उनके मंत्रियों को नहीं दिखता है. इसी को लेकर हमने न्याय यात्रा शुरू की है. हिंसा से कुछ नहीं होने वाला है. इससे बेरोजगारी और महंगाई फैलेगी.

जनसभा के बाद कांग्रेस नेता ने हेमंत सोरेन के विधानसभा में भाषण का जिक्र करते हुए एक्स पर लिखा, “हेमंत सोरेन जी ने आज विधानसभा में बहुत मार्मिक बात कही “हम जंगल से बाहर आए, इनके बराबर में बैठ गए, तो इनके कपड़े मैले हो गए.” यह सिर्फ एक बयान नहीं, पूरे आदिवासी समाज की संयुक्त पीड़ा है. प्रदेश में एक आदिवासी मुख्यमंत्री है, यही बात भाजपा को बर्दाश्त नहीं हो रही है. आज झारखंड ने पूरे देश को यह संदेश दिया है कि जनता की ताकत को डराकर झुकाया नहीं जा सकता. यह गरीबों और आदिवासियों की एकता की जीत है, आप सभी को बधाई.”

एसएनसी/एबीएम