
New Delhi, 29 जुलाई . भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने Lok Sabha में राहुल गांधी के भाषण, पेपर लीक के मुद्दे, छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, सांसद कंगना रनौत के जेन-जी संबंधी बयान, पंजाब में शिक्षा व्यवस्था और विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि संसद में पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर ठोस चर्चा करने के बजाय विपक्ष ने निराधार आरोप लगाकर लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास किया.
Lok Sabha में राहुल गांधी द्वारा छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और Government पर लगाए गए आरोपों पर आरपी सिंह ने कहा कि संसद में चर्चा का विषय पेपर लीक था, लेकिन राहुल गांधी ने इस मूल मुद्दे पर कोई सार्थक चर्चा नहीं की. पेपर लीक रोकने के उपायों, परीक्षा प्रणाली में सुधार या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किसी ठोस सुझाव पर बात नहीं की गई. इसके बजाय निराधार आरोप लगाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की गई. यदि राहुल गांधी के पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण हैं तो उन्हें संसद के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए, अन्यथा संसदीय नियमों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
राहुल गांधी का समर्थन करते हुए Samajwadi Party प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर Government से जवाब मांगे जाने पर आरपी सिंह ने कहा कि यदि संसद परिसर में असामाजिक तत्व प्रवेश कर जाते हैं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि आंदोलन में शामिल असामाजिक तत्व कौन थे और क्या उनमें Samajwadi Party से जुड़े लोग भी शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने पूरे आंदोलन को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की और जांच के बाद दोषियों की पहचान सामने आएगी.
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा Government से First Information Report वापस न लेने पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी और BJP MP कंगना रनौत के जेन-जी संबंधी बयान पर पूछे गए सवाल पर आरपी सिंह ने कहा कि कंगना रनौत की टिप्पणी उनका व्यक्तिगत बयान है. उन्होंने कहा कि Government और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए समझौते में स्पष्ट था कि किसी भी निर्दोष छात्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि, यह कहीं नहीं कहा गया कि आंदोलन की आड़ में हिंसा, पत्थरबाजी या उपद्रव करने वाले लोगों पर भी कार्रवाई नहीं होगी.
आरपी सिंह ने दावा किया कि Police ने लगभग 2,800 से 3,300 ऐसे लोगों की पहचान की है जो विभिन्न Political दलों से प्रेरित होकर आंदोलन में शामिल हुए थे. इनमें कुछ लोग हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म और पोक्सो जैसे गंभीर मामलों के आरोपी भी हैं. यदि ऐसे लोगों ने कानून व्यवस्था भंग की है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी.
पंजाब में पेपर लीक की घटना पर आरपी सिंह ने राज्य की भगवंत मान Government को घेरते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में तीन बार पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं. हालिया फार्मेसी परीक्षा पेपर लीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि Government भले ही आरोपियों को पकड़ने का दावा करे, लेकिन यह तथ्य नहीं बदलता कि पेपर पहले लीक हुआ. पंजाब की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है. राज्य में लगभग 55,000 शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि करीब 16,000 पद खाली हैं. इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों की कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है.
उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के एक कथित बयान का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि उन्होंने स्वयं लोगों को आंदोलन में भेजने की बात कही थी. आरपी सिंह ने कहा कि यदि किसी ने आंदोलन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ या कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है. Supreme Court का यह कहना उचित है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए और यदि किसी ने कानून तोड़ा है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
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