
New Delhi, 19 मई . केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-Mumbai एक्सप्रेसवे के सराय काले खान से जैतपुर तक बने 9 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड खंड का निरीक्षण किया. इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली की Chief Minister रेखा गुप्ता, मंत्री प्रवेश वर्मा समेत कई अन्य नेता भी उपस्थित रहे.
यह महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना दिल्ली और Mumbai के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है. इसके पूरा होने के बाद दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है.
निरीक्षण के दौरान मीडिया से बातचीत में Union Minister नितिन गडकरी ने कहा कि यह एक सुनियोजित परियोजना है और इसी सोच के तहत इसे लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि कालिंदी कुंज दिल्ली के सबसे अधिक ट्रैफिक दबाव वाले इलाकों में से एक है और Government इसे सिग्नल-फ्री बनाने की दिशा में काम कर रही है.
गडकरी ने कहा कि ट्रैफिक समस्याएं लगातार बदलती रहती हैं और यह दावा करना संभव नहीं कि हर समस्या का पूरी तरह समाधान हो जाएगा. हालांकि, Government का इरादा साफ है और वह हर स्तर पर समस्याओं को कम करने का प्रयास कर रही है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना आसान नहीं है, लेकिन लॉन्ग टर्म प्लानिंग के जरिए ट्रैफिक दबाव को कम किया जाएगा और लोगों को सस्टेनेबल डेवलपमेंट के साथ बेहतर राहत देने की कोशिश की जाएगी.
Union Minister ने सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए Government की ‘राह-वीर योजना’ का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है, तो Government की ओर से उसे 25 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा.
इसके अलावा, दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को किसी भी अस्पताल में भर्ती कराने पर Government अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक का खर्च आठ दिनों के इलाज के लिए अस्पताल को तुरंत उपलब्ध कराएगी. इसका उद्देश्य हादसे में घायल लोगों की जान बचाना है.
नितिन गडकरी ने कहा कि दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, यदि सड़क हादसे में घायल लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए तो हर साल करीब 50 हजार लोगों की जान बचाई जा सकती है.
उन्होंने मीडिया और आम लोगों से भी अपील की कि सड़क सुरक्षा और घायल लोगों की मदद को लेकर जागरूकता फैलाने में सहयोग करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके.
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डीबीपी
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