
चंडीगढ़, 29 जुलाई . पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने Wednesday को राज्य में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े बार-बार होने वाले विवादों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि बार-बार हो रही गड़बड़ियों ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर युवाओं का भरोसा कम कर दिया है.
उनका कहना है कि प्रशासनिक विफलताओं या Government द्वारा जवाबदेही स्वीकार न करने के कारण लाखों योग्य उम्मीदवारों के भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता.
बाजवा का कहना है कि आम आदमी पार्टी Government ने बार-बार दावा किया है कि उसके कार्यकाल में एक भी परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है. हालांकि, पिछले साढ़े चार वर्षों में भर्ती परीक्षाओं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर एक के बाद एक कई विवाद सामने आए हैं.
नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, पंजाब राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (पीएसटीईटी), पेपर लीक की पुष्टि के बाद 12वीं कक्षा की बोर्ड अंग्रेजी परीक्षा का रद्द होना, ग्रुप-बी भर्ती विवाद और अब फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा से जुड़े आरोप और गड़बड़ियों ने Government के दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बाजवा ने पूछा कि Government भले ही फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने की बात मानने से इनकार करे, लेकिन नाम बदलने से असलियत नहीं बदलती. अगर परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठे हैं, अगर कथित तौर पर संगठित तरीके से नकल हुई है, और अगर पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर शक पैदा हुआ है, तो जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या हजारों युवा उम्मीदवारों के साथ हुई नाइंसाफी सिर्फ इसलिए मिट जाएगी क्योंकि Government इसे कुछ और नाम देना चाहती है?
वह सवाल उठाते हैं कि देश भर में एक जैसी घटनाओं के लिए अलग-अलग पैमाने क्यों अपनाए जाते हैं.
बाजवा ने कहा कि जब भी कहीं और परीक्षा का पेपर लीक होता है, तो आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तुरंत इस्तीफे और जवाबदेही की मांग करती हैं. पंजाब इसके लिए अपवाद क्यों होना चाहिए? जवाबदेही के लिए दूसरे राज्यों और पंजाब के लिए अलग-अलग पैमाने नहीं हो सकते.
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एमएस/
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