जनप्रतिनिधियों को जनाकांक्षाओं पर खरा उतरना होगा-ओम बिरला

कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन की इण्डिया रीजन की बैठक

लखनऊ . लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि लोकतंत्र हमारे राष्ट्र की आत्मा है. भारत लोकतंत्र के मूल्यों की स्थापना करते हुए विश्व का नेतृत्व कर रहा है. भारत का संविधान लोकतंत्र का रक्षक है. राज्यसभा, लोकसभा, विभिन्न राज्यों के विधानमण्डल, निर्वाचन के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को चुनना यह सब हमारे लोकतंत्र का प्रतीक हैं. चुनावों में मतदान का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है, जो दर्शाता है कि लोगों का विश्वास लोकतंत्र में बढ़ा है. इससे जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है. उन्हें हर हाल में जनाकांक्षाओं पर खरा उतरना होगा, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि को उच्च स्थान प्राप्त है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हमारी आस्थायें जड़ें बहुत गहरी है दरअसल लोकतंत्र राष्ट्र की आत्मा है और इस विश्व के अंदर सबसे बड़े लोकतंत्र के अंदर लोकतंत्र की आस्था विश्वास में आज भी भारत पूरे विश्व में नेतृत्व कर रहा है. इसीलिये हमारी संसद, हमारे विधानमंडल संविधान के उच्च आदर्शो का रक्षक है, सहभागी है और लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और नागरिको के विकास का पर्याय हमारा लोकतंत्र है.

उत्तर प्रदेश में पहली बार होने वाली कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए) के इंडिया रीजन की कांफ्रेंस गुरुवार को शुरू हुई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत सीपीए कांफ्रेंस के सभी प्रतिनिधि विधान सभा पहुंचे. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दीप जलाकर सातवें सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस मौके पर अपने सम्बोधन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लखनऊ उप्र देवभूमि है. लखनऊ के अंदर आप आईये मुस्कुराइयें यह यहां की विरासत रही है. उप्र ने हमेशा देश की राजनीति का नेतृत्व किया है देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री उप्र ने दिये है.

उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानमंडल लोकतांत्रिक निकायों के चुनाव संचालन निर्वाचन प्रक्रिया में लोगो की सक्रिय उत्साहपूर्ण भागीदारी हमारे लोकतंत्र का मजबूत प्रतीक है. आजाद भारत के बाद हर चुनाव के अंदर मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ना यह विश्वास दिलाता है कि भारत की जनता का लोकतंत्र के प्रति और विश्वास बढ.ा है और इसी के साथ जब जनता का विश्वास बढ़ा है भरोसा बढ़ा है तो जनप्रतिनिधि की और अधिक जिम्मेदारी बढ़ है. इसीलिये चाहे सांसद हो चाहे विधायक हो हमारी नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है कि हम जनता के विश्वास और भरोसे पर जनप्रतिनिधि के रूप में खरे उतरे और इसीलिये राष्ट्र के आशाओं के अभिरक्षक के रूप में भारत के जनप्रतिनिधि काम कर रहे है.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंदर भी जनप्रतिनिधि का सबसे उच्च स्थान भी रहा है और समाज के उन गरीब से गरीब तबको को उनके जीवन को उपर उठाने में हमारी महत्वपूर्ण दायित्व और भूमिका भी है. भारत एक ऐसा देश है जहां राजनीतिक बहुलवाद भी है जहां अलग-अलग जातियां, धर्म, भाषा, बोली, इतना बड़ा देश और विविधता में एकता हमारी संस्कृति का प्रतीक रहा है. इसीलिये हमारी संसदीय परंपरा भी जीवंत और सक्रिय रूप से रही है. उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक बहुलवाद मौजूद है.

इसके अलावा धर्म, बोली, खान-पान इत्यादि की विविधता से उपजी अनेकता में एकता हमारे लोकतंत्र का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं को सदन के अन्दर नियमों तथा परम्पराओं के साथ प्रभावी ढंग से रखना चाहिए, ताकि लोगों को प्रभावी समाधान मिले. उन्होंने कहा कि सदन लोकतंत्र का मन्दिर है. यहां पर मिलने वाली वाक्स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र को मजबूत करती है. ऐसे में जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी हैं कि वे संसदीय परम्पराओं और नियमों का पालन करते हुए मर्यादित ढंग से अपने दायित्वों का निर्वाह करें.

बिरला ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का यह दायित्व है कि वे सरकार को जनता की आकांक्षाओं से अवगत कराए. उन्हें कानून बनाने में भी महत्वपूर्ण भागीदारी निभानी चाहिए. संसद और विधानमण्डल जनता के प्रति जवाबदेह बनें. जनप्रतिनिधिगण को अपनी बातें संसदीय समितियों के माध्यम से भी रखनी चाहिए. नीति निर्धारण तथा उनके अनुपालन में भी भूमिका निभानी चाहिए. साथ ही, बजटीय प्रावधानों की समय-समय पर समीक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि बजट का उपयोग समाज के अन्तिम व्यक्ति की भलाई के लिए करना चाहिए, ताकि उसका जीवन आसान बन सके.

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को संसदीय परम्पराओं का स्तर ऊपर उठाने का भी काम करना चाहिए. उन्होंने पीठासीन अधिकारियों के अधिकारों को सीमित करने पर विचार करने की बात भी कही. उन्होंने सदन को निर्बाध रूप से चलाने पर चर्चा किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में आवश्यक कानून भी बनाया जाएगा, ताकि सदन निर्बाध रूप से चल सके और उपलब्ध समय का सदुपयोग हो सके. उन्होंने सदस्यों द्वारा सदन में व्यक्त किए गए विचारों पर सरकार के ध्यान देने की आवश्यकता पर भी बल दिया.
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि, आपसी सामंजस्य से संसदीय गतिरोध रोकने के लिए गहन विचार करना चाहिए. उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यूपी की वाराणसी से सांसद हैं.

पिछले साल पटना में सीपीए सम्मेलन हुआ था. पिछले दिनों महात्मा गांधी की जयंती पर 36 घंटे यूपी विधानसभा का सत्र चला. वहीं मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि मेरा सौभाग्य रहा कि, यहां के दोनों सदनों का सदस्य रहा हूं. स्पीकर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. जिस तरह से लोकसभा अध्यक्ष के दिशा निर्देशन में विधेयक पारित हुए हैं, उसके लिए उनकी भूमिका सराहनीय है. उन्होंने कहा कि सत्ता का काम सरकार चलाना होता है. उसी तरह विपक्ष को अपनी बात कहने का हक होता है. लेकिन दोनों पक्षों को बोलने के लिए लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी चाहिए. यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. भारतीय लोकतंत्र की भावना राष्ट्रमंडल की भावना के अनुरूप है. भारत राष्ट्रमंडल की सराहना करता है. हमारे संविधान निर्माताओं ने लोकतंत्र की जिम्मेदारी बचाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए हमें अपनी भूमिका निभानी होगी. एकता और अखंडता की हम आज भी रक्षा कर रहे हैं. इस सम्मेलन से ठोस निष्कर्ष निकलेंगे, जिनसे लोकतंत्र और मजबूत होगा. राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) की उन राष्ट्रमंडल देशों के विधानमंडलों में 180 से अधिक शाखाएँ हैं, जहाँ संसदीय लोकतंत्र है. ये सभी शाखाएँ भौगौलिक रूप से नौ राष्ट्रमंडल क्षेत्रों में बंटी हैं.

विदित हो कि सीपीए भारत क्षेत्र, जो पहले सीपीए एशिया क्षेत्र का भाग था, 7 सितंबर 2004 से एक स्वतंत्र क्षेत्र बन गया. सीपीए भारत क्षेत्र में भारत केंद्र शाखा (भारत की संसद) और 30 राज्य, संघ राज्य क्षेत्र शाखाएँ हैं. सी पी ए भारत क्षेत्र के ऐसे सम्मेलनों का आयोजन दो वर्ष में एक बार किया जाता है और इसका छठा सम्मेलन वर्ष 2017 में पटना में हुआ था. सीपीए भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन में लगभग 100 प्रतिनिधियों के शामिल हो रहे है. सीपीए के ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र और साउथ ईस्ट एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रतिनिधि भी सीपीए भारत क्षेत्र सम्मेलन में भाग ले रहे है.

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