
New Delhi, 12 अगस्त . Prime Minister Narendra Modi ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर Wednesday को सुभाषित शेयर किया है. पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर भारतीय के युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति भी बताया.
Prime Minister मोदी ने युवाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “हमारे युवा साथी देश का भविष्य ही नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति भी हैं. उन्होंने अपनी संवेदनशीलता, सेवाभाव और सामर्थ्य से दुनियाभर में अलग पहचान बनाई है.”
इसके साथ ही Prime Minister ने संस्कृत का श्लोक भी एक्स पर पोस्ट किया, “चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्. प्रसादयति यो लोकं तं लोकोऽनुप्रसीदति..” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है- “जो व्यक्ति अपनी दृष्टि, विचारों, वाणी और कर्मों के माध्यम से लोगों का हृदय जीत लेता है, वह ही उनके विश्वास, सम्मान और सद्भाव का पात्र बनता है.”
इससे पहले Tuesday को Prime Minister की ओर से social media एक्स पर लिखा गया था, “अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च. पराक्रमश्च बहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च..” इस श्लोक का अर्थ है, “ये आठ गुण मनुष्य के जीवन को प्रकाशमान करते हैं. बुद्धि उसके मार्ग को स्पष्ट करती है, सदाचार उसके आचरण को पवित्र बनाता है और संयम उसे अनुशासित रखता है. ज्ञान उसे विवेक देता है, वीरता कठिन परिस्थितियों में अडिग रखती है और वाणी की कुशलता उसे समाज में सम्मान दिलाती है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना और उपकारों के प्रति कृतज्ञ रहना उसके व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करते हैं.”
Monday को Prime Minister की ओर से संस्कृत श्लोक, “भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥” साझा किया गया था, जिसका हिंदी अर्थ है, “हम सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें, कल्याणकारी विचारों को अपनाएं. स्वस्थ शरीर, उत्तम आचरण और श्रेष्ठ गुणों के साथ जीवन को लोकहित में समर्पित करें तथा सत्य, प्रामाणिक और जनहितकारी सूचनाओं का प्रसार कर राष्ट्र और समाज को जागरूक, सशक्त तथा समरस बनाएं.”
इससे पहले Prime Minister की ओर से 7 अगस्त को सुभाषित शेयर किया गया था. तब पीएम ने social media पर पोस्ट कर लिखा था, “किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्. स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥”
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, “चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की इच्छा से अपनी किरणों द्वारा कमुदुनी को प्रकाशित नहीं करता, अपितु यह उसका स्वाभाविक गुण है. उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव में होता है.”
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ओपी/एएस
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