छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू करने की तैयारी शुरू, जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में कमेटी गठित

रायपुर, 26 जून . छत्तीसगढ़ Government ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है. Government के इस अहम कदम से राज्य के कानूनी और सामाजिक ढांचे में बदलाव आ सकता है.

कैबिनेट ने जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाने को मंजूरी दी है. इस कमेटी का काम कानून का ड्राफ्ट तैयार करना होगा, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) Government के चुनावी वादों में से एक को पूरा किया जा सकेगा.

इस फैसले के साथ, छत्तीसगढ़ उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जो यूसीसी के अपने-अपने वर्शन पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.

पड़ोसी राज्य Madhya Pradesh ने पहले ही यह प्रक्रिया शुरू कर दी है और विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र में इससे जुड़ा बिल पेश किए जाने की संभावना है.

छत्तीसगढ़ में पांच सदस्यों वाली इस कमेटी की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी. वह Supreme Court की पूर्व जज हैं और अहम संवैधानिक व कानूनी पैनलों का नेतृत्व करने के लिए जानी जाती हैं.

उनके साथ कमेटी में रिटायर्ड नौकरशाह, अनुभवी कानूनी विशेषज्ञ और सीनियर वकील शामिल हैं. उनका काम मौजूदा कानूनी ढांचे की जांच करना, छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड की संभावनाओं का आकलन करना और Government को विस्तृत सुझाव सौंपना है.

इस कमेटी का गठन एक जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया की शुरुआत भर है. आने वाले महीनों में, पैनल अलग-अलग समुदायों में शादी, तलाक, भरण-पोषण, विरासत, उत्तराधिकार, गोद लेने और अभिभावकत्व से जुड़े पर्सनल कानूनों का विस्तृत अध्ययन करेगा.

यह कमेटी Supreme Court और हाई कोर्ट के अहम फैसलों की समीक्षा भी करेगी, कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेगी, सामाजिक संगठनों से जुड़ेगी और अलग-अलग धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी ताकि सभी तरह के नजरियों को ध्यान में रखा जा सके.

Government के इस कदम को कानूनी और Political, दोनों ही लिहाज से एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी पर लंबे समय से बहस होती रही है, लेकिन राज्य स्तर पर इसे लागू करने में अभी समय लगेगा.

इस कमेटी का गठन करके, छत्तीसगढ़ Government ने पर्सनल कानूनों को समानता और न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप बनाने का इरादा ज़ाहिर किया है, साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा है.

कानून का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद, इस पर व्यापक चर्चा और बहस होने की संभावना है, जिससे राज्य में पर्सनल कानूनों की व्याख्या और उन्हें लागू करने का तरीका तय होगा.

एएसएच/पीएम