भारत-हंगरी पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप गठन की तैयारी, हंगरी की संसद अध्यक्ष से मिले भारतीय राजदूत

बुडापेस्ट, 23 जून . हंगरी में India के राजदूत अंशुमन गौर ने Tuesday को वहां की राष्ट्रीय संसद (नेशनल असेंबली) की स्पीकर एग्नेस फॉर्स्टहोफर से मुलाकात की. इस दौरान दोनों पक्षों ने India और हंगरी के बीच सहयोग बढ़ाने और संसदीय आदान-प्रदान को मजबूत करने पर चर्चा की.

हंगरी में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा, “राजदूत को हंगरी की नेशनल असेंबली की स्पीकर एग्नेस फॉर्स्टहोफर से मुलाकात करने का सम्मान मिला. बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग, संसदीय आदान-प्रदान और लोकतंत्र तथा संसदीय व्यवस्था में हमारी साझा आस्था जैसे विषयों पर चर्चा हुई. यह बताते हुए खुशी हो रही है कि जल्द ही भारत-हंगरी पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप की स्थापना की जाएगी.”

दूतावास ने कहा, “एक खास जुड़ाव भी है. स्पीकर का संबंध बालाटनफुरेड शहर से है, जो हमारे लिए बेहद खास है क्योंकि हम इस साल ‘टैगोर वर्ष’ मना रहे हैं. यह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की उस ऐतिहासिक यात्रा की 100वीं वर्षगांठ है, जब उन्होंने इस शहर का दौरा किया था.”

अप्रैल में Prime Minister Narendra Modi ने हंगरी के Prime Minister पीटर मग्यार और उनकी टिस्जा पार्टी को संसदीय चुनावों में शानदार जीत के लिए बधाई दी थी. यह जीत हंगरी की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है.

Prime Minister मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “पीटर मग्यार और टिस्जा पार्टी को चुनाव में शानदार जीत के लिए हार्दिक बधाई. India और हंगरी के बीच गहरी दोस्ती, साझा मूल्य और आपसी सम्मान का मजबूत रिश्ता है. मैं दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत बनाने तथा भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का इच्छुक हूं, ताकि हमारे लोगों की समृद्धि और भलाई सुनिश्चित हो सके.”

यह बधाई संदेश उस समय आया जब 12 अप्रैल को हुए हंगरी के संसदीय चुनावों में टिस्जा पार्टी ने संसद में बड़ी बहुमत हासिल की. इस नतीजे के साथ विक्टर ओर्बान के 16 साल लंबे शासन का अंत हो गया. लगभग सभी वोटों की गिनती पूरी होने के बाद उनकी फिडेस्ज़ पार्टी ने हार स्वीकार कर ली.

Prime Minister मोदी का संदेश India और हंगरी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों को भी दर्शाता है. Political और आर्थिक बदलावों के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते स्थिर और सकारात्मक बने रहे हैं. शीत युद्ध के बाद हंगरी की विदेश नीति में बदलाव आने के बावजूद दोनों देशों के संबंध हमेशा करीबी, दोस्ताना और आपसी सम्मान पर आधारित रहे हैं.

एवाई/डीकेपी