
नोएडा, 5 मई . नोएडा में ट्रैफिक को सुगम बनाने और कनेक्टिविटी को बेहतर करने के उद्देश्य से प्रस्तावित नए एलिवेटेड रोड के निर्माण की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. महामाया फ्लाईओवर के पास से सेक्टर-94 तक बनने वाले इस एलिवेटेड रोड के लिए इन दिनों मिट्टी की जांच (सॉइल टेस्टिंग) और टोपोग्राफी सर्वे का कार्य किया जा रहा है.
इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की को सौंपी गई है. प्राधिकरण के महाप्रबंधक एसपी सिंह के अनुसार, सॉइल टेस्टिंग के जरिए जमीन की बियरिंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता का पता लगाया जा रहा है. यह जानकारी एलिवेटेड रोड के डिजाइन और उसकी संरचना तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.
उन्होंने बताया कि आईआईटी रुड़की एक सप्ताह के भीतर डीपीआर तैयार कर प्राधिकरण को सौंप देगा. साथ ही, टोपोग्राफी सर्वे के तहत इलाके का विस्तृत भौगोलिक अध्ययन किया जा रहा है. इस सर्वे में जमीन की ऊंचाई, ढलान, समोच्च रेखाएं, पेड़-पौधे, जल स्रोतों और आसपास की मौजूदा संरचनाओं जैसे इमारतों और सड़कों का सटीक मानचित्र तैयार किया जा रहा है.
यह सर्वे भविष्य की योजना को सटीक और व्यावहारिक बनाने में मदद करेगा. करीब 1.5 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड रोड लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा. यह रोड एक लिंक एलिवेटेड के रूप में काम करेगा, जो महामाया फ्लाईओवर के पास स्थित चिल्ला एलिवेटेड को सेक्टर-94 क्षेत्र से जोड़ेगा.
इस कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए क्लोवर लीफ इंटरचेंज भी प्रस्तावित है, जिससे वाहनों का आवागमन बिना रुकावट के हो सकेगा. इसके अलावा, सेक्टर-94 की ओर प्रस्तावित पुश्ता एलिवेटेड से भी इस रोड को जोड़ने की योजना है. हालांकि, इसके लिए सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलना आवश्यक होगा. यदि एनओसी मिल जाती है, तो एलिवेटेड रोड को पुश्ता रोड पर भी उतारा जा सकता है, जिससे लोग आसानी से आगे के मार्ग पर जुड़ सकेंगे.
इस परियोजना के पूरा होने के बाद नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को बेहतर एवं तेज आवागमन की सुविधा मिल सकेगी.
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पीकेटी/डीकेपी
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